वरदा चतुर्थी 2024: गणपति की असीम कृपा पाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलतियां!
ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की पावन चतुर्थी तिथि को ‘वरदा चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की साधना के लिए अत्यंत विशेष है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से बप्पा की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से साधक को सुख, शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार इस दिन कुछ विशेष सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं, क्योंकि छोटी सी भूल भी गणेश जी को रुष्ट कर सकती है और पूजा के पुण्य फल को कम कर सकती है।
सावधान! वरदा चतुर्थी पर इन कार्यों से बचें:
- तुलसी दल का प्रयोग न करें: भगवान गणेश की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों को शामिल नहीं करना चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार, एक श्राप के कारण बप्पा की पूजा में तुलसी वर्जित है, इसलिए भूलकर भी इसका उपयोग न करें।
- काले वस्त्रों का त्याग: हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों के दौरान काला रंग अशुभ माना जाता है। वरदा चतुर्थी के दिन काले कपड़े पहनने से नकारात्मकता का संचार हो सकता है, जिससे भगवान गणेश अप्रसन्न हो सकते हैं।
- तामसिक भोजन से दूरी: इस पवित्र दिन पर मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे मानसिक शुद्धि भंग होती है और कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
- बुजुर्गों का सम्मान: वरदा चतुर्थी पर अपने माता-पिता या घर के बुजुर्गों का अपमान भूलकर भी न करें। उनका अनादर करने से घर की बरकत चली जाती है।
- वाद-विवाद और गंदगी: इस दिन किसी से भी झगड़ा न करें और न ही मन में किसी के प्रति बुरे विचार लाएं। साथ ही, घर और पूजा स्थल पर गंदगी न रहने दें, क्योंकि स्वच्छता में ही ईश्वर का वास होता है और गंदगी से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
शुभ मुहूर्त और तिथि:
इस वर्ष वरदा चतुर्थी 20 मई को मनाई जाएगी। तिथियों का विवरण इस प्रकार है:
- चतुर्थी तिथि का आरंभ: 19 मई को दोपहर 02 बजकर 18 मिनट से।
- चतुर्थी तिथि का समापन: 20 मई को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर।
उदया तिथि के अनुसार, वरदा चतुर्थी का मुख्य पर्व और पूजन 20 मई को ही संपन्न किया जाएगा। बप्पा की कृपा पाने के लिए इन नियमों का पालन अवश्य करें।
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