फुटबॉल के मैदान के बेताज बादशाह और दुनिया के सबसे बड़े सितारों में शुमार क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम को अलविदा कहने का बड़ा फैसला कर लिया है। 41 साल के रोनाल्डो ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए यह बताया कि अब वह अपनी प्रतिष्ठित जर्सी नंबर 7 को विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं। इसी के साथ उनके दो दशक से अधिक लंबे और शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत अब करीब नजर आ रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उन्होंने फिलहाल क्लब फुटबॉल से संन्यास लेने का कोई ऐलान नहीं किया है।
अपने विदाई संदेश में रोनाल्डो ने यह स्वीकार किया कि यह फैसला उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि जिंदगी के कुछ फैसले केवल दिमाग से नहीं बल्कि सीधे दिल से लिए जाते हैं। अपने चाहने वालों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने लिखा कि अगर उनके किसी भी गोल ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाई हो, किसी को जश्न मनाने का मौका दिया हो, किसी की फिक्र दूर की हो या देश को गर्व महसूस कराया हो, तो उनका यह पूरा सफर सार्थक हो गया। उन्होंने अपने परिवार, पुर्तगाल की महान जनता, अपने साथियों, कोचों और हर उस शख्स का धन्यवाद किया जो इस सफर में उनके साथ रहा। रोनाल्डो ने अंत में लिखा कि पुर्तगाल हमेशा उनके दिल की धड़कन बनकर रहेगा।
आंकड़ों के आईने में देखें तो रोनाल्डो का सफर ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने पुर्तगाल के लिए रिकॉर्ड 234 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और बंपर 146 गोल दागे हैं। आज वह पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने और सर्वाधिक गोल करने वाले निर्विवाद खिलाड़ी हैं। साल 2003 में जब उन्होंने पहली बार अपने देश की जर्सी पहनी थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह सफर लगभग 23 साल तक चलेगा और इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाएगा।
उनकी कप्तानी का जादू ही था कि पुर्तगाल ने साल 2016 में पहली बार यूरोपीय चैंपियनशिप (यूरो कप) का ऐतिहासिक खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद उनकी अगुवाई और शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम ने 2019 और 2025 में नेशंस लीग की ट्रॉफी भी चूमी। इन तमाम ऐतिहासिक सफलताओं के केंद्र में रोनाल्डो ही रहे, जिनकी जादुई मौजूदगी ने ग्लोबल फुटबॉल के नक्शे पर पुर्तगाल को एक नई और मजबूत पहचान दिलाई।
भले ही उनके इस विदाई सफर की पटकथा कुछ खट्टे-मीठे विवादों के बीच लिखी गई हो। उनके चिर-प्रतिद्वंद्वी और लंबे समय के साथी लियोनेल मेसी ने पिछले महीने ही अर्जेंटीना के लिए अपना अंतिम मैच खेला था, वहीं रोनाल्डो का पुर्तगाल के लिए आखिरी मुकाबला बीते 24 सितंबर को वेल्स के खिलाफ रहा था, जिसमें उनकी टीम ने 1-0 से शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद मुख्य कोच जॉर्ज जीसस ने अगले मैच में उन्हें शुरुआती ग्यारह (प्लेंइग इलेवन) में जगह नहीं दी थी और यह साफ किया था कि आगे भी उन्हें शुरुआत से खिलाने की कोई योजना नहीं है। इस फैसले के बाद रोनाल्डो टीम के ट्रेनिंग कैंप से बाहर चले गए थे।
हालांकि, बाद में कोच जॉर्ज जीसस ने यह जरूर कहा था कि रोनाल्डो की टीम में वापसी पूरी तरह से उनके खुद के फैसले पर निर्भर करती है और उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे हमेशा खुले हैं। लेकिन इन सब कयासों के बीच अब खुद रोनाल्डो ने देश के लिए खेलने का सिलसिला हमेशा के लिए रोकने का पक्का इरादा कर लिया है।
पुर्तगाल फुटबॉल महासंघ ने भी अपने इस महान खिलाड़ी के अतुलनीय योगदान के लिए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। महासंघ का मानना है कि रोनाल्डो ने पूरी दुनिया में पुर्तगाल के मान-सम्मान को कई गुना बढ़ाया है और उन अनगिनत युवाओं के दिलों में चिंगारी जलाई है जो उनके जैसा महान फुटबॉलर बनने का ख्वाब देखते हैं। महासंघ अब उनके इस अद्वितीय सम्मान में एक भव्य विदाई समारोह आयोजित करने की योजना बना रहा है, जहां देशवासी और उनके तमाम प्रशंसक अपने चहेते हीरो को आखिरी बार राष्ट्रीय जर्सी में ट्रिब्यूट दे सकें।
जहां तक बात मैदान पर उनके जलवे की है, तो रोनाल्डो अभी क्लब फुटबॉल खेलना जारी रखेंगे। वर्तमान में वह सऊदी अरब के मशहूर क्लब ‘अल-नस्र’ से जुड़े हुए हैं और यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह इसी सत्र के अंत में अपने चमकदार क्लब करियर को भी विराम दे देंगे। फिलहाल उनका पूरा फोकस एक ऐतिहासिक मील का पत्थर छूने पर है—अपने करियर में कुल 1,000 गोल पूरे करना। रोनाल्डो अब तक 985 गोल दाग चुके हैं और इस जादुई आंकड़े से वह अब महज 15 कदम दूर हैं।
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