दिल्ली और मुंबई के बीच हुआ यह मुकाबला आखिरी सांस तक सांसें रोक देने वाला रहा! मैच किस करवट बैठेगा, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन सा था। जब दिल्ली की टीम हार की कगार पर खड़ी थी और बराबरी के गोल के लिए ताबड़तोड़ हमले कर रही थी, तभी इंजरी टाइम में उसे ऐतिहासिक सफलता मिली। इसके बाद तो दिल्ली ने पलक झपकते ही एक और गोल दागकर मैच का नक्शा ही बदल डाला। हालांकि शुरुआती स्कोर का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है, लेकिन आखिरी पलों के इन धमाकेदार घटनाक्रमों ने इस मैच को फुटबॉल प्रेमियों के जेहन में हमेशा के लिए अमर कर दिया है।
मैच के आखिरी दौर में दिल्ली ने जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। मुंबई के दुर्ग को भेदने के लिए लगातार हमले किए जा रहे थे। इस बीच, दिल्ली के कोच ने कुछ रणनीतिक बदलाव करते हुए फ्रेश खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा। इनमें से एक थे अक्षत मेहरा, जिन्होंने 92वें मिनट में वह करिश्मा कर दिखाया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। अक्षत ने कुछ दूरी से पूरी ताकत से गोल की तरफ शॉट लिया। मुंबई के अनुभवी गोलकीपर रेहेनेश के पास इस गेंद को आसानी से थामने का मौका था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था—गेंद उनके हाथों से छिटककर सीधे जाली में समा गई। इस एक भूल ने दिल्ली को जीवनदान देते हुए बराबरी पर ला खड़ा किया।
इस जादुई बराबरी के बाद दिल्ली के खिलाड़ियों का हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया। टीम ने मुंबई को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं दिया और पलक झपकते ही एक और गोल ठोक दिया। इस दूसरे गोल के बाद मैदान पर जश्न का सैलाब उमड़ पड़ा। खिलाड़ी पेना खुशी से इस कदर झूमे कि उन्होंने अपनी जर्सी उतार दी और दौड़ते हुए अपनी टीम के टेक्निकल एरिया की तरफ पहुंच गए। उनका यह जोश चीख-चीख कर बता रहा था कि यह गोल उनके लिए क्या मायने रखता है। जिस टीम के हाथ से कुछ ही मिनट पहले मुकाबला फिसलता दिख रहा था, उसके खिलाड़ी अब जीत के जश्न में डूबे हुए थे।
जैसे ही मैच खत्म होने की अंतिम सीटी बजी, दिल्ली के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैदान पर एक जश्न सा माहौल बन गया, जहां सब एक-दूसरे को गले लगाकर इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वापसी की बधाई दे रहे थे। आखिरी पलों में दो लगातार गोल दागना दिल्ली के लिए किसी करिश्माई उपलब्धि से कम नहीं था, खासकर तब जब मैच पूरी तरह उनके हाथ से निकलता नजर आ रहा था।
दूसरी तरफ, मुंबई के खेमे में मायूसी छा गई। पूरे मैच में अपनी पकड़ मजबूत रखने के बाद, आखिरी पलों में इस तरह मैच गंवा देना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। गोलकीपर रेहेनेश की वह गलती लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी, क्योंकि अक्षत मेहरा का वह शॉट ऐसा नहीं था जिसे रोका न जा सके। लेकिन यही तो फुटबॉल की खूबसूरती और क्रूरता है—यहाँ एक गोलकीपर की मामूली सी चूक पूरे मैच का पासा पलट सकती है।
यह मुकाबला इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है कि फुटबॉल में ‘इंजरी टाइम’ अक्सर उम्मीदों का आखिरी और सबसे रोमांचक अध्याय होता है। यह वो वक्त है जब एक गोल या तो हार टाल देता है या फिर हारी हुई बाजी जिता देता है। दिल्ली ने इसी मौके को भुनाया और अपनी जिद्द से मैच का रुख मोड़ दिया। वहीं, मुंबई के लिए यह हार कई गंभीर सवाल छोड़ गई है—खासकर अंतिम क्षणों में उनकी डिफेंसिव रणनीति और गोलकीपिंग पर। इस महामुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि फुटबॉल में तब तक कुछ भी खत्म नहीं होता जब तक आखिरी सीटी न बज जाए और जीत का सेहरा वही टीम पहनती है जो अंतिम सांस तक मैदान पर शेर की तरह डटी रहती है।
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