‘बाहर का शोर भूलें, 50 साल का सूखा खत्म करें’: जर्सी विवाद पर पी आर श्रीजेश की दो टूक
(मोना पार्थसारथी)
नयी दिल्ली, दो अगस्त: भारतीय हॉकी के दिग्गज गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने टीम की जर्सी का रंग ‘केसरिया’ किए जाने पर छिड़े विवाद को सिरे से खारिज कर दिया है। टोक्यो ओलंपिक और पेरिस ओलंपिक में भारत की जीत के नायक रहे श्रीजेश का मानना है कि टीम को मैदान के बाहर की आवाजों को अनसुना कर अपनी पूरी ऊर्जा 50 साल बाद विश्व कप पदक जीतने पर लगानी चाहिए।
जर्सी विवाद पर हैरानी जताते हुए श्रीजेश ने कहा, “सच कहूं तो मुझे पहले समझ ही नहीं आया कि मसला क्या है। 2014 और 2018 के विश्व कप में भी जर्सी का रंग बदला था। यहां तक कि हमारी एक ट्रेनिंग किट का रंग भी ऑरेंज (केसरिया) है। फिर इस बार इतनी चर्चा क्यों? केसरिया रंग की वजह से या सिर्फ जर्सी बदलने की वजह से?”
गौरतलब है कि नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप के लिए भारतीय टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को बदलकर केसरिया कर दिया गया है। इस फैसले पर वीरेन रासकिन्हा, धनराज पिल्लै, और परगट सिंह जैसे कई पूर्व दिग्गजों ने सवाल उठाए हैं।
पेरिस ओलंपिक के बाद कोचिंग की कमान संभालने वाले श्रीजेश ने तर्क दिया, “अगर विवाद रंग बदलने को लेकर है, तो यह 2014 और 2018 में भी होना चाहिए था जब हमने पीली और हल्की नीली जर्सी पहनी थी।” हालांकि, उन्होंने इस तर्क पर असहमति जताई कि नीली टर्फ पर नीली जर्सी में खेलने में दिक्कत होती है। भारत के लिए 339 मैच खेल चुके इस पूर्व दिग्गज ने कहा, “हम सालों से नीली जर्सी में ही खेलते आए हैं। अगर रंग दृश्यता (visibility) की वजह से बदला जा रहा है, तो फिर हमें नीली जर्सी कभी नहीं पहननी चाहिए।”
श्रीजेश ने कहा कि 2012 लंदन ओलंपिक में नीली टर्फ आने के बाद से पिछले 14 सालों में हम लगभग हर बड़े टूर्नामेंट (टोक्यो और पेरिस ओलंपिक सहित) में नीली जर्सी में ही खेले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर यह फैसला खिलाड़ियों की मर्जी से हुआ है, तो विवाद का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा, “हॉकी इंडिया ने नियमों के तहत अनुमति ली होगी। चूंकि नीदरलैंड की जर्सी भी ऑरेंज है, तो उनके खिलाफ हम अपनी दूसरी सफेद जर्सी पहन सकते हैं। मैदान पर खिलाड़ियों को उतरना है, अगर वे सहज हैं तो बात वहीं खत्म हो जाती है।”
राजनीति और खेल के घालमेल पर उन्होंने कहा, “राजनीति को खेलों से दूर रखना चाहिए। खिलाड़ी सबसे अहम है और अगर उन्हें दिक्कत नहीं है, तो बाहर बैठे लोगों को परेशान नहीं होना चाहिए।”
हालांकि, श्रीजेश ने एक व्यावहारिक सुझाव जरूर दिया कि जर्सी का बदलाव थोड़ा पहले होना चाहिए था। उन्होंने कहा, “मैदान पर हमें एक-दूसरे को नीली जर्सी में देखने की आदत है। अगर मुझे हरमनप्रीत को पास देना है, तो मेरी नजरें उसे नीली जर्सी में ही तलाशेंगी। खिलाड़ियों को इस नए रंग के साथ तालमेल बिठाने के लिए थोड़ा वक्त मिलना चाहिए था।”
विश्व कप को लेकर आशान्वित श्रीजेश ने टीम को जीत का मंत्र देते हुए कहा, “बाहर की बातों को भूलकर पूरा फोकस टूर्नामेंट पर करें। भारत के पास 50 साल का इंतजार खत्म करने का यह सबसे सुनहरा मौका है। पूल में सिर्फ इंग्लैंड ही कड़ी चुनौती है, सेमीफाइनल की राह आसान दिख रही है। अपेक्षाओं का दबाव छोड़ो, अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलो और पोडियम पर जगह बनाओ। ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा।”
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