ऑस्ट्रेलियाई धरती पर अब नहीं लगता ‘परायापन’, भारतीय टीम की बदली रणनीति
2015 में ऑस्ट्रेलिया का पहला दौरा भारतीय टीम के लिए कई मायनों में यादगार था, लेकिन उस वक्त की तुलना में अब काफी कुछ बदल चुका है। तब पिच, बाउंस और परिस्थितियों को समझना एक बड़ी चुनौती होती थी, लेकिन अब तस्वीर काफी अलग है।
बदलाव की बयार: 2015 के बाद का सफर
2015 विश्व कप के बाद भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर नियमित रूप से खेलना शुरू किया।
रणनीति में बड़ा बदलाव: पिच नहीं, परफॉर्मेंस पर ज़ोर
पहले जहाँ पिचों की बनावट और उछाल पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता था, वहीं अब रणनीति और टाइमिंग पर ज़ोर दिया जा रहा है। “हम अब इस बारे में सोच रहे हैं कि हम कहां रन बना सकते हैं, इसलिए हम रणनीति और टाइमिंग पर बात कर रहे हैं। हम पिच की नहीं, बल्कि इस बारे में बात कर रहे हैं कि हम कैसे रणनीति बना सकते हैं,” अक्षर पटेल ने बताया। यह स्पष्ट संकेत है कि टीम अब अपने खेल पर ज़्यादा केंद्रित है, न कि बाहरी परिस्थितियों पर।
जडेजा की गैरमौजूदगी में अक्षर पर बड़ी ज़िम्मेदारी
रविंद्र जडेजा की अनुपस्थिति में, इस श्रृंखला में अक्षर पटेल पर बल्ले और गेंद दोनों से बड़ी ज़िम्मेदारी होगी। एशिया कप में शानदार प्रदर्शन के बाद, अक्षर ऑस्ट्रेलिया में एक लंबे अंतराल के बाद खेल रहे हैं। “मैं इस श्रृंखला को लेकर बहुत आश्वस्त हूं। एशिया कप में मैंने बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन किया था। लंबे समय (2022 टी20 विश्व कप) के बाद, मैं ऑस्ट्रेलिया में खेलूंगा। मैं इस चुनौती के लिए तैयार हूं,” उन्होंने आत्मविश्वास जताया।
यह बदलाव न केवल टीम के अनुभव और आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय क्रिकेट टीम अब हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए कितनी बेहतर तरीके से तैयार है।
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