नोएडा की RG रेजिडेंसी सोसायटी में बिजली कनेक्शन और मेंटिनेंस शुल्क को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से जारी विवादित नोटिसों को रद्द कर दिया। मामला उन निवासियों से जुड़ा था, जिन्होंने मेंटिनेंस शुल्क का भुगतान नहीं किया था।
- RG रेजिडेंसी AOA ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका
- पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने जारी किए थे नोटिस
- हाईकोर्ट ने दोनों नोटिस किए निरस्त
- मेंटिनेंस शुल्क को लेकर था मुख्य विवाद
- मल्टीपॉइंट और सिंगल कनेक्शन का मुद्दा भी चर्चा में
- नियमित भुगतान करने वाले निवासियों के लिए भी अहम मामला
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद आगे क्या?
RG रेजिडेंसी AOA ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी याचिका
RG रेजिडेंसी अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) और बिजली आपूर्ति से जुड़े विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल की गई थी। विवाद उस समय बढ़ा, जब कुछ निवासियों द्वारा मेंटिनेंस शुल्क का भुगतान नहीं करने पर AOA ने उनके बिजली कनेक्शन काट दिए थे।
इसके बाद संबंधित निवासियों ने बिजली वितरण कंपनी से शिकायत की और मल्टीपॉइंट बिजली कनेक्शन की मांग भी उठाई।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने जारी किए थे नोटिस
मामले में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से 8 अप्रैल और 13 अप्रैल 2026 को AOA को नोटिस जारी किए गए थे।
नोटिस में बिजली आपूर्ति और मेंटिनेंस शुल्क की वसूली को लेकर आपत्ति जताई गई थी। AOA से बिजली आपूर्ति बहाल करने और निवासियों को मल्टीपॉइंट कनेक्शन उपलब्ध कराने को कहा गया था।
इन नोटिसों को चुनौती देते हुए AOA ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने दोनों नोटिस किए निरस्त
मामले की सुनवाई जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने की। अदालत ने विवादित नोटिसों को निरस्त करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
हाईकोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी जस्टिस अरिंदम सिन्हा और सत्यवीर सिंह की खंडपीठ के कई 2026 के मामलों के आदेश दर्ज हैं।
इस आदेश के बाद RG रेजिडेंसी AOA को बिजली और मेंटिनेंस शुल्क से जुड़े इस विशेष विवाद में राहत मिली है।
मेंटिनेंस शुल्क को लेकर था मुख्य विवाद
सोसायटी में कुछ निवासी नियमित रूप से मेंटिनेंस शुल्क का भुगतान नहीं कर रहे थे। AOA का पक्ष था कि सोसायटी की सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले निवासियों से निर्धारित शुल्क लिया जाना जरूरी है।
इसी भुगतान विवाद के बीच कुछ निवासियों के बिजली कनेक्शन काटे गए। इसके बाद बिजली विभाग और AOA के बीच विवाद कानूनी स्तर तक पहुंच गया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले में नोटिसों के आधार पर AOA पर की जा रही कार्रवाई का रास्ता खत्म हो गया है।
मल्टीपॉइंट और सिंगल कनेक्शन का मुद्दा भी चर्चा में
RG रेजिडेंसी का मामला केवल मेंटिनेंस शुल्क तक सीमित नहीं रहा। इसमें सिंगल पॉइंट बनाम मल्टीपॉइंट बिजली कनेक्शन का मुद्दा भी सामने आया।
मल्टीपॉइंट व्यवस्था में अलग-अलग फ्लैटों के लिए स्वतंत्र बिजली कनेक्शन और मीटर की व्यवस्था होती है, जबकि कुछ सोसायटियों में बिजली की आपूर्ति और बिलिंग की व्यवस्था अलग मॉडल के तहत चलती है।
RG रेजिडेंसी में इसी व्यवस्था को लेकर निवासियों और AOA के बीच मतभेद सामने आया था।
नियमित भुगतान करने वाले निवासियों के लिए भी अहम मामला
AOA से जुड़े पक्षों के मुताबिक, हाईकोर्ट का आदेश उन सोसायटियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है जहां मेंटिनेंस शुल्क की वसूली और बिजली आपूर्ति को लेकर विवाद चलते हैं।
हालांकि, इस आदेश को नोएडा और गाजियाबाद की सभी सोसायटियों पर लागू होने वाला सामान्य नियम मानना उचित नहीं होगा। प्रत्येक सोसायटी की बिजली व्यवस्था, उपनियम और संबंधित कानूनी परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
RG रेजिडेंसी AOA के पूर्व सचिव अविनाश अरुण ने मीडिया रिपोर्टों में इस फैसले को सोसायटी और नियमित भुगतान करने वाले निवासियों के पक्ष में बताया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आगे क्या?
अदालत द्वारा विवादित नोटिस रद्द किए जाने के बाद RG रेजिडेंसी में बिजली और मेंटिनेंस शुल्क से जुड़ा मौजूदा विवाद एक अलग स्थिति में पहुंच गया है। अब सोसायटी स्तर पर मेंटिनेंस शुल्क की वसूली और बिजली व्यवस्था को लेकर आगे की प्रक्रिया संबंधित नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होगी।
इस मामले ने नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में मेंटिनेंस शुल्क, बिजली कनेक्शन और AOA की भूमिका से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
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