सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की 119 साल पुरानी मस्जिद को गिराए जाने के बाद यूपी की सियासत गरमा गई है। विपक्ष प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है। अब अखिलेश यादव के निर्देश पर समाजवादी पार्टी का 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचेगा और पूरे मामले की रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा।
7 सितंबर को सहारनपुर पहुंचेगा सपा प्रतिनिधिमंडल
सहारनपुर की पुरानी मस्जिद को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। समाजवादी पार्टी ने इस मामले की जानकारी जुटाने के लिए 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर भेजने का फैसला किया है। पार्टी के मुताबिक यह प्रतिनिधिमंडल सोमवार, 7 सितंबर को सहारनपुर जाएगा।
पहले प्रतिनिधिमंडल के 6 सितंबर को जाने की बात कही गई थी, लेकिन कार्यक्रम में बदलाव किया गया। अब सपा नेता प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेंगे।
कमिश्नर से मुलाकात करेगा प्रतिनिधिमंडल
सपा के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर के कमिश्नर से मुलाकात करेगा। पार्टी का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम, प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित पक्षों से मिली जानकारी का जायजा लेगा।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल अपनी रिपोर्ट समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस दौरे की जानकारी साझा की है।
कौन-कौन नेता होंगे शामिल?
22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कैराना सांसद इकरा हसन, सांसद हरेंद्र मलिक, सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसेन, पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान और विधायक अतुल प्रधान शामिल हैं।
इसके अलावा विधायक आशु मलिक और विधायक उमर अली समेत पार्टी के कई अन्य नेता भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। इससे साफ है कि सपा इस मुद्दे को संगठनात्मक स्तर पर गंभीरता से उठा रही है।
इकरा हसन ने कोर्ट जाने की बात कही
सपा सांसद इकरा हसन ने पहले ही मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कोर्ट जाने की बात कही थी।
इकरा हसन ने दावा किया था कि मस्जिद पर Places of Worship Act लागू होता है और यह 1947 से पहले की बनी हुई है। उन्होंने कार्रवाई को संविधान और कानून व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और मामले की कानूनी स्थिति अदालत के निर्णयों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड से तय होगी।
प्रशासन और मुस्लिम पक्ष के बीच क्या हुआ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट ने पिछले महीने मस्जिद को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय का रुख किया था।
बताया गया कि अदालत ने पहले सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगाई थी। बाद में शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से किए गए दावे को खारिज कर दिया गया, जिसके बाद प्रशासन ने मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई की। इसी घटनाक्रम के बाद विवाद ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
अब सपा की रिपोर्ट पर नजर
सहारनपुर पहुंचने के बाद सपा प्रतिनिधिमंडल प्रशासन और संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाएगा। पार्टी की ओर से तैयार रिपोर्ट आगे की राजनीतिक रणनीति में अहम हो सकती है।
वहीं, पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई, अदालत के आदेश और मस्जिद से जुड़े रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब असली सवाल यही है कि इस विवाद का कानूनी समाधान किस दिशा में जाता है।
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