पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए सचिन पायलट को राज्य का प्रभारी बनाया है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। अब पायलट के सामने संगठन की गुटबाजी खत्म करने, नेताओं को साथ लाने और कांग्रेस को सत्ता की दौड़ में वापस खड़ा करने की चुनौती है।
सचिन पायलट को मिली पंजाब की जिम्मेदारी
कांग्रेस ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाने का भरोसा जताया।
पायलट ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण अवसर हैं। उन्होंने मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने का संकल्प जताया।
खरगे, सोनिया और राहुल का जताया आभार
सचिन पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, CPP चेयरपर्सन सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास और मजबूत संगठन के जरिए पंजाब में कांग्रेस को मजबूत किया जाएगा।
पायलट के बयान से साफ है कि पार्टी अब चुनावी तैयारी के साथ-साथ संगठन को एकजुट करने पर भी जोर दे रही है।
छह महासचिवों की जिम्मेदारियों में बदलाव
कांग्रेस ने शनिवार को छह महासचिवों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया। सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया गया, जबकि भूपेश बघेल को असम भेजा गया है।
इसके अलावा रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. श्रीविला प्रसाद को महाराष्ट्र और वीपी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। सुरजेवाला के पास कर्नाटक का प्रभार भी बना रहेगा।
2027 चुनाव से पहले गुटबाजी बड़ी चुनौती
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं। इससे पहले कांग्रेस की राज्य इकाई में अंदरूनी खींचतान चर्चा में रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग तथा उनके समर्थकों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
भूपेश बघेल समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कई दौर की बैठकें कीं, लेकिन राज्य के नेताओं के बीच पूरी सहमति बनाने में मुश्किलें बनी रहीं।
पायलट के सामने नेताओं को साथ लाने की परीक्षा
सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने को कांग्रेस की संगठनात्मक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि राज्य इकाई में मतभेद चुनावी अभियान पर हावी न हों।
राजा वड़िंग को पायलट का करीबी माना जाता है। ऐसे में अब सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि पायलट राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक दूरी कितनी कम कर पाते हैं और पार्टी नेताओं को एक मंच पर कैसे लाते हैं।
सत्ता वापसी की राह कितनी आसान?
कांग्रेस के लिए पंजाब में चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि संगठन को चुनाव से पहले मजबूत करने की भी है। सचिन पायलट के सामने स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल, कार्यकर्ताओं का भरोसा और पार्टी की एकजुट छवि कायम करने की जिम्मेदारी होगी।
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