मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों पर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने का संकेत दिया है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर से ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है, जो उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।
कांग्रेस का बड़ा धार्मिक-सियासी ऐलान
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाने का फैसला किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने घोषणा की है कि 20 अक्टूबर से ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू की जाएगी।
यह यात्रा उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी। दिग्विजय सिंह ने इसे ‘शिव धाम से राम धाम’ तक की यात्रा बताया है। दशहरे के दिन शुरू होने वाली इस यात्रा के जरिए कांग्रेस धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात जनता तक पहुंचाने की तैयारी में है।
रामशिला पूजन का भी किया जिक्र
दिग्विजय सिंह ने अपने पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि 1988-89 में विश्व हिंदू परिषद ने रामशिला पूजन अभियान शुरू किया था। उन्होंने कहा कि वैचारिक रूप से वह VHP और RSS के विरोधी रहे हैं, लेकिन भगवान राम से जुड़े अभियान में उन्होंने भी हिस्सा लिया था।
उनके मुताबिक, उन्होंने रामशिला पूजन अभियान के लिए दान भी दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने VHP, RSS और BJP पर दान के कथित दुरुपयोग और आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाए।
राम मंदिर चंदे को लेकर गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर जुटाए गए चंदे का गलत इस्तेमाल किया गया। उनका दावा है कि इसी पैसे से कुछ लोग गाड़ियां खरीद रहे हैं और मकान बना रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये के घपले का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। ऐसे में इन्हें फिलहाल राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘भगवान राम हमारी आस्था के केंद्र’
दिग्विजय सिंह ने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उनके मुताबिक, राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का आंदोलन एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया था, लेकिन चंदे और धार्मिक आस्था से जुड़े कथित मामलों ने उन्हें दुखी किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों की आस्था और उनके योगदान का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इसके लिए जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई।
दशहरे के दिन शुरू होगी यात्रा
दिग्विजय सिंह के मुताबिक यात्रा की शुरुआत 20 अक्टूबर यानी दशहरे के दिन उज्जैन से होगी। दशहरा परंपरागत रूप से धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रतीक को यात्रा के संदेश से जोड़ते हुए उन्होंने इसे ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ नाम दिया है।
उज्जैन को धार्मिक नगरी के तौर पर यात्रा का शुरुआती केंद्र बनाना और अयोध्या तक जाना कांग्रेस के राजनीतिक संदेश को भी स्पष्ट करता है।
कांग्रेस की रणनीति पर बढ़ेगी चर्चा
मध्य प्रदेश में कांग्रेस का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब देश की राजनीति में धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दे लगातार चुनावी विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं। दिग्विजय सिंह का ऐलान कांग्रेस की उस कोशिश के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें पार्टी सनातन और भगवान राम से जुड़े मुद्दों पर अपनी अलग राजनीतिक व्याख्या जनता के सामने रखना चाहती है।
अब देखना होगा कि उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित यह यात्रा कांग्रेस को कितना राजनीतिक लाभ देती है। फिलहाल इतना तय है कि ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के ऐलान ने मध्य प्रदेश की सियासत में धार्मिक मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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