दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक ढहने से सात लोगों की मौत ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और अवैध निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बिना मंजूरी बनी पांचवीं मंजिल वाली इमारतों को सील करने का आदेश दिया है। यह फैसला सिर्फ एक इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के इलाकों में सुरक्षा जांच को लेकर भी बड़ा कदम माना जा रहा है।
कई MCD अधिकारी निलंबित
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। सरकार ने बिल्डिंग मालिक की गिरफ्तारी की भी जानकारी दी है। कार्रवाई का मकसद जिम्मेदारी तय करने के साथ यह संदेश देना है कि लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
PG और आसपास की इमारतों पर नजर
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा PG में रहते हैं। ऐसे में हादसे के बाद सरकार ने आसपास मौजूद PG और अन्य इमारतों की बारीकी से जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग और अन्य सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
छात्रों के बीच बढ़ी चिंता
हादसे वाली इमारत करीब 30 साल पुरानी बताई जा रही है और उसका इस्तेमाल लड़कों के PG के तौर पर हो रहा था। इमारत गिरने के बाद आसपास रहने वाले छात्रों में स्वाभाविक रूप से डर पैदा हुआ है। कई लोगों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इमारत में वे रह रहे हैं, उसकी संरचनात्मक सुरक्षा आखिर कितनी मजबूत है।
पुलिस जांच में गंभीर धाराएं
साउथ कैंपस थाने में बिल्डिंग मालिक समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा खतरे में डालने जैसे आरोपों के तहत जांच शुरू की है। राहत और बचाव अभियान हादसे के अगले दिन भी जारी रहा।
अवैध निर्माण पर अब असली परीक्षा
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में पुराने और अनधिकृत निर्माण की निगरानी पर बहस तेज कर दी है। कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी जब जांच केवल हादसे के बाद तक सीमित न रहे, बल्कि समय रहते कमजोर और नियमविरुद्ध इमारतों की पहचान हो। आखिरकार, किसी इमारत के गिरने के बाद जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, लेकिन उससे पहले लोगों की जान बचाना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
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