भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी शहर की स्वच्छता, 35 करोड़ के बावजूद गंदगी का राज!
भागलपुर: लाखों रुपये खर्च करने और महीनों तक माथापच्ची के बाद भी भागलपुर शहर गंदगी के दलदल में फंसा हुआ है। 26 महीने बीत चुके हैं, शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार की बातें सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। नगर सरकार और निगम प्रशासन दोनों ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
सफाई एजेंसियों की मनमानी, नगर सरकार का मौन:
शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन दो एजेंसियों, साइन इंटरप्राइजेज और सीडीएस फैसिलिटी को सौंपी गई है, उनकी कार्यशैली पर नगर सरकार ने कई बार सवाल उठाए। उन्हें हटाने के उपक्रम भी किए गए, लेकिन हर बार ये एजेंसियां बच निकलती हैं। आलम यह है कि एजेंसियों को हटाने का मुद्दा अब पूरी तरह ठंडे बस्ते में चला गया है।
निर्णय ठंडे बस्ते में, जनता परेशान:
पहले निगम प्रशासन सफाई एजेंसियों को हटाने के पक्ष में नहीं था, लेकिन जब नगर सरकार ने सख्ती दिखाई तो मामला उलझ गया। इसी नगर सरकार के विरोध के कारण तत्कालीन नगर आयुक्त डॉ. योगेश सागर और नितिन कुमार का तबादला कर दिया गया। डॉ. प्रीति ने तो सफाई एजेंसियों को हटाने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश फाइल में दर्ज कर दी थी। इसके बाद एजेंसियों ने खुद को हटाए जाने की आशंका से काम भी बंद कर दिया था। यह घटना नगर आयुक्त शुभम कुमार के कार्यभार संभालने से कुछ दिन पहले की है।
महज 60% कचरा उठता है, 40% गंदगी का अंबार:
सफाई व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। सड़कों पर कचरा जमा है और वार्डों में नियमित सफाई नहीं हो रही है। यह सवाल उठ रहा है कि जब निर्णय पहले ही हो चुका था, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? दरअसल, सफाई की ठेका प्रेम की वजह से एजेंसियों को हटाना मुमकिन नहीं हुआ है।
दुर्गापूजा और दिवाली पर भी गंदगी का साया:
शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। दुर्गापूजा के दौरान जहां सड़कों पर गंदगी का अंबार लगा रहा, वहीं अब दिवाली में भी हालात बदलने की उम्मीद नहीं है। दिवाली रोशनी और स्वच्छता का त्योहार माना जाता है, लेकिन शहर की सूरत अब भी बदरंग बनी हुई है।
26 महीने में 35 करोड़, फिर भी बदहाली:
शहर की सफाई व्यवस्था पर 35 करोड़ से अधिक राशि खर्च होने के बावजूद हालात जस के तस हैं। वार्ड संख्या 14 से 51 तक सफाई की जिम्मेदारी दो एजेंसियों साइन इंटरप्राइजेज और सीडीएस फैसिलिटी को सौंपी गई है। दोनों एजेंसियां अगस्त 2023 से काम कर रही हैं और अब तक उन्हें करीब 35 करोड़ रुपये भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद प्रतिदिन केवल 60 फीसदी कचरा ही उठाया जा रहा है। बाकी 40 फीसदी कचरा सड़कों और मोहल्लों में जमा रह जाता है, जिससे शहर में गंदगी और दुर्गंध बढ़ती जा रही है। इतना कचरा जमा रहना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और इससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ जाती है। हर दिन 260 मीट्रिक टन कूड़ा जमा हो रहा है।
महत्वपूर्ण आंकड़े:
- रोजाना जमा हो रहा कूड़ा: 260 मीट्रिक टन
- रोजाना होता उठाव: 60%
- लोगों को बीमार करने के लिए पर्याप्त कूड़ा: 40%
- दोनों एजेंसी को हर महीने पास होता बिल: 01 करोड़ 34 लाख 98 हजार रुपये
- दोनों एजेंसियों का कार्यकाल: 02 साल 02 महीने
- अब तक एजेंसियों को बिल भुगतान: 35 करोड़ 09 लाख 48 हजार रुपये
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


