दिल्ली-NCR में सांसों पर संकट! AQI 334 पहुंचते ही लागू हुआ GRAP-2, वाहन, उद्योग और कचरा जलाने पर होगी सख्त निगरानी।
- दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, आज सुबह AQI 334 दर्ज होने के साथ ही पूरे क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से GRAP-2 लागू कर दिया गया है।
- मौसम के तल्ख तेवरों और प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते आने वाले दिनों में भी प्रदूषण से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं।
- GRAP-2 के तहत सड़कों की मशीनों से सफाई, युद्ध स्तर पर पानी का छिड़काव और वाहनों के PUC सर्टिफिकेट की जांच तेज होगी।
- अब उद्योगों, ईंट भट्ठों, पावर प्लांट्स और होटलों में कोयले-लकड़ी से जलने वाले तंदूरों पर शिकंजा और ज्यादा कस दिया गया है।
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर खतरनाक रूप धारण कर लिया है। राजधानी और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने मंगलवार को पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण यानी GRAP-2 तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। मंगलवार की सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 334 दर्ज किया गया, जिसके बाद सरकारी एजेंसियों को प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए एक्टिव मोड में ला दिया गया है।
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की आबोहवा में तेजी से गिरावट आई है। बीते 31 अक्टूबर को जहां राजधानी का AQI 117 के साथ ‘मध्यम’ श्रेणी में था, वहीं 1 नवंबर को यह उछलकर 261 पर पहुंच गया। इसके बाद 2 नवंबर की शाम 4 बजे AQI 324 दर्ज किया गया और मंगलवार की सुबह यह आंकड़ा बढ़कर 334 तक जा पहुंचा। साफ है कि महज कुछ ही दिनों में प्रदूषण का जहर हवा में घुल चुका है।
फिलहाल राहत के आसार नहीं, प्रदूषण बढ़ने की आशंका
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने हवा के इस भयंकर हाल के पीछे प्रतिकूल मौसमी दशाओं को मुख्य वजह बताया है। आयोग का मानना है कि आने वाले दिनों में भी दिल्ली-NCR की हवा ‘बेहद खराब’ कैटेगरी में ही बनी रहेगी। मौसम विभाग (IMD) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटीरियोलॉजी (IITM) के अनुमानों में भी फिलहाल वायु प्रदूषण से किसी तरह की राहत मिलने के संकेत नहीं मिले हैं।
इन गंभीर हालातों को भांपते हुए आयोग ने तमाम संबंधित एजेंसियों को GRAP के पहले और दोनों चरणों के नियमों को पूरी सख्ती से जमीन पर उतारने का निर्देश दिया है। नगर निगमों को सड़कों की मशीनों से सफाई, नियमित रूप से पानी का छिड़काव और जरूरत के मुताबिक एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल बढ़ाने को कहा गया है। साथ ही, घरेलू कचरे और कंस्ट्रक्शन वेस्ट का समय पर उठान और सही निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जबकि खुले में कचरा जलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वाहनों और उद्योगों पर बढ़ेगी निगरानी, तंदूर में कोयले-लकड़ी पर रोक
प्रदूषण के इस तांडव को रोकने के लिए ट्रैफिक व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया जा रहा है। प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाएगी, ताकि सड़कों पर गाड़ियों का लंबा जाम न लगे और धुएं का उत्सर्जन कम हो। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच अभियान तेज किया जाएगा। ज्यादा धुआं फेंकने वाली गाड़ियां रडार पर होंगी और पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों पर चल रहे प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
GRAP-2 के दायरे में अब उद्योगों, ईंट भट्ठों और थर्मल पावर प्लांट्स की ताबड़तोड़ जांच होगी। इन सभी इकाइयों को पॉल्यूशन नॉर्म्स का पूरी तरह पालन करने और सिर्फ अप्रूव्ड ईंधन इस्तेमाल करने की सख्त हिदायत है। इसके अलावा, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों को अपने तंदूरों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगानी होगी। इसकी जगह उन्हें बिजली या गैस से चलने वाले उपकरणों पर शिफ्ट होना पड़ेगा।
क्या है GRAP-1, GRAP-2, GRAP-3 और GRAP-4 का मतलब?
आपको बता दें कि GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-NCR में प्रदूषण से लड़ने के लिए तैयार किया गया एक चरणबद्ध फॉर्मूला है। हवा का स्तर जितना गिरता है, इसके पाबंदियों वाले चरण उतने ही सख्त होते जाते हैं। प्रदूषण के स्तर के हिसाब से इसमें निम्नलिखित श्रेणियां तय हैं:
- GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच होने पर लागू होता है, जिसे ‘खराब’ श्रेणी माना जाता है।
- GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच पहुंचने पर एक्टिव होता है, यह ‘बेहद खराब’ श्रेणी है।
- GRAP-3: AQI 401 से 450 के दायरे में आने पर लगता है, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी कहा जाता है।
- GRAP-4: AQI के 450 का आंकड़ा पार करने पर अंतिम और सबसे सख्त हथियार के रूप में लागू होता है।
गौरतलब है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बीते सितंबर में GRAP के नियमों में कुछ अहम संशोधन किए थे। इसके तहत GRAP-3 के दौरान लगने वाली गाड़ियों से जुड़ी पाबंदियों का दायरा बढ़ाकर हरियाणा के सोनीपत तक कर दिया गया है। इससे पहले बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल या उससे पुरानी गाड़ियों पर यह बैन केवल गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में ही लागू था। बहरहाल, मौजूदा समय में दिल्ली-NCR की जहरीली होती हवा को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है और प्रदूषण पर ताबड़तोड़ कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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