भारत और इजराइल के बीच करीब 8000 करोड़ रुपये का रक्षा सौदा होने जा रहा है। इसके तहत इजराइल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज भारतीय वायुसेना को छह एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान देगी। ये नए टैंकर पुराने रूसी विमानों की जगह लेंगे और लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन देकर उनकी मारक क्षमता तथा मिशन रेंज को काफी बढ़ा देंगे।
इजराइल के राजनीतिक समीकरण चाहे जो रहे हों, लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत की सामरिक ताकत को बढ़ाने वाला एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है जिसने दुश्मनों की नींद उड़ा दी है। भारत और इजराइल की इस नई महा-डील ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। दरअसल, आसमान की जंग में भारत अब एक ऐसा अचूक चक्रव्यूह रच रहा है जिसके आगे दुश्मन की हर चाल नाकाम साबित होगी। पीएम मोदी और नेतन्याहू की गहरी दोस्ती की यह एक और शानदार मिसाल है, जिसके तहत भारत और इजराइल की सरकारी रक्षा कंपनी ‘इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ (IAI) के बीच लगभग 900 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹8000 करोड़ के रक्षा सौदे पर मुहर लगने वाली है। इस डील के तहत इजराइल भारतीय वायुसेना को छह अत्याधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट सप्लाई करेगा। आपको बता दें कि इजराइल के पास हवा में ईंधन भरने वाले विमान तैयार करने का 40 साल से ज्यादा का बेजोड़ अनुभव है और वह दुनिया के 12 से अधिक देशों के लिए ऐसे विमानों को मॉडिफाइड कर चुका है।
इन नए टैंकर विमानों के बेड़े में शामिल होने से भारतीय वायुसेना के पुराने पड़ चुके रूसी इल्यूशिन-78 विमानों की छुट्टी हो जाएगी। इस डील के फाइनल होने के बाद इनकी डिलीवरी 2028 से 2030 के बीच होने की उम्मीद है। इसके बाद हमारे फाइटर जेट्स हवा में ही रिफ्यूल होकर आसमान में लंबी छलांग लगाने और दुश्मन के घर में घुसकर सटीक स्ट्राइक करने में पूरी तरह अजय हो जाएंगे। आइए जानते हैं कि इजराइल के साथ इस ऐतिहासिक डील से भारत को क्या-क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं। सबसे पहले, इससे हमारे लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल रेंज में भारी बढ़ोतरी होगी। डील के तहत मिलने वाले बोइंग 767 रिफ्यूलर विमानों की मदद से भारत के सुखोई-30 एमकेआई, राफेल और तेजस जैसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान हवा में ही ईंधन भर सकेंगे, जिससे उन्हें बिना जमीन पर उतरे हजारों किलोमीटर दूर तक के मिशन को अंजाम देने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर भारत को एक रणनीतिक और निर्णायक बढ़त हासिल होगी।
इस डील के जरिए मिलने वाले इन टैंकरों से भारतीय लड़ाकू विमान देश के भीतर के एयरबेसों से उड़ान भरकर सीधे दुश्मन के ठिकानों पर गहरी और घातक मार करने में सक्षम हो जाएंगे। यह विशेष रूप से हिंद महासागर और दूरदराज के संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भारत की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगा। युद्ध या किसी भी आपातकालीन स्थिति में हमारे विमानों को बार-बार ईंधन के लिए जमीन पर उतरने और दोबारा उड़ान भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे न केवल कीमती समय बचेगा, बल्कि विमानों का ‘टर्न-अराउंड टाइम’ (यानी दोबारा मिशन के लिए तैयार होने का समय) भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इसके अलावा, बिल्कुल नए रिफ्यूलिंग विमान खरीदने के मुकाबले पुराने बोइंग 767 यात्री विमानों को टैंकरों में तब्दील करना काफी किफायती सौदा है, जिससे भारत को बेहद कम बजट में विश्वस्तरीय तकनीक और मारक क्षमता मिल रही है। इस नई डील से हमारी ‘मिड-एयर रिफ्यूलिंग’ की पुरानी कमी भी पूरी तरह दूर हो जाएगी, क्योंकि फिलहाल भारतीय वायुसेना जिन रूसी मूल के रिफ्यूलर्स का इस्तेमाल कर रही है, वे अक्सर रखरखाव और सर्विसिंग से जुड़ी तकनीकी समस्याओं से जूझते रहते है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


