ब्रिटेन से आई एक बड़ी और राहत भरी खबर ने हजारों भारतीय परिवारों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है! ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने विदेशी स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के लिए स्थायी निवास की प्रतीक्षा अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 15 साल करने के अपने पहले के सख्त और विवादास्पद रुख में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। संसद में इस बात की घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने एक बेहद “न्यायसंगत व्यवस्था” तैयार की है।
इस नए बदलाव के तहत, वे सभी स्वास्थ्य कर्मी जो कोविड-19 महामारी के बेहद मुश्किल दौर में ब्रिटेन की पुकार पर वहां सेवा देने पहुंचे थे, उन्हें पुराने नियमों की तरह अब मात्र 5 साल में ही स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) की अनुमति मिल जाएगी। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय द्वारा इसी साल जारी किए गए ताजा आंकड़ों पर अगर नजर डालें, तो स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल श्रेणी के तहत वीजा विस्तार पाने वालों में सबसे बड़ा आंकड़ा भारतीयों का ही है।
दिसंबर 2025 को समाप्त हुए पूरे वर्ष के दौरान भारतीयों को कुल 1,04,555 बार वीजा की अवधि बढ़ाने की मंजूरी दी गई थी। इनमें से अब अधिकांश लोग उसी पुरानी और निर्धारित पांच साल की समय-सीमा के भीतर ही ‘इंडेफिनिट लीव टू रिमेन’ (ILR)—यानी ब्रिटेन में अनिश्चितकाल तक रहने की अनुमति—पाने के पूरी तरह हकदार बन जाएंगे।
इस बड़े नीतिगत बदलाव पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि, “आज के समय में आम जनता एक ऐसी आव्रजन व्यवस्था की मांग करती है जिस पर सरकार का पूरा नियंत्रण हो, देश की अर्थव्यवस्था में अपना कीमती योगदान देने वालों को पूरा मान-सम्मान मिले और नियमों का ईमानदारी से पालन करने वालों को उसका सीधा लाभ हासिल हो।” प्रधानमंत्री ने आगे जोर देते हुए यह भी कहा कि उनके ये नए प्रस्ताव ठीक इसी बुनियादी सिद्धांत पर मजबूती से टिके हुए हैं और ब्रिटेन की धरती पर विदेशी कर्मियों द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान को पूरे दिल से स्वीकार करते हैं।
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