आदेश का सख्त लहजा साफ है: अब 27.3 एकड़ का यह पूरा साम्राज्य—जिसमें खड़ी भव्य इमारतें, मजबूत ढांचे, बिछे हुए मखमली लॉन और तमाम साजो-सामान शामिल हैं—सीधे राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में लौट आएगा। भूमि एवं विकास कार्यालय के जरिए पट्टादाता यानी महामहिम इस पूरी संपत्ति का पूर्ण नियंत्रण वापस ले लेंगे।
तारीख मुकर्रर हो चुकी है—5 जून! इसी दिन भूमि एवं विकास कार्यालय इस पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रहा है। आदेश में दोटूक चेतावनी दी गई है कि तय समय पर शांतिपूर्वक तरीके से परिसर का कब्जा प्रतिनिधियों को सौंप दिया जाए। यदि इसमें कोई ढिलाई बरती गई, तो प्रशासन कानून के कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए खुद इसे अपने नियंत्रण में ले लेगा।
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