गिरफ्तारी की कड़ियाँ: एसबीआई की आड़ में धोखाधड़ी का जाल
जांच एजेंसी की पड़ताल ने एक ऐसे ठगी के गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के नाम का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया। अपराधियों ने चालाकी से फर्जी ईमेल डोमेन तैयार किए और एसबीआई की ओर से जाली समर्थन पत्र जारी कर दिए। इस कारनामे से सेकी (SECI) को भी यह यकीन हो गया कि उनके सामने पेश किए गए बैंक गारंटी (बीजी) पूरी तरह वैध हैं। आगे की जांच में यह भी सामने आया कि इन फर्जी डोमेन में असली बैंक डोमेन से मिलते-जुलते अक्षर बदल कर धोखेबाजी की गई थी, जो एक ही शातिर गिरोह के इशारों पर काम कर रहे थे। इस गिरोह का मकसद कमीशन के एवज में ऐसी झूठी गारंटी जारी कर लोगों को ठगना था।
यह कोई पहली घटना नहीं है जब ऐसे गिरोह को पकड़ा गया हो। इससे पहले, अगस्त 2025 में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ओडिशा स्थित मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, पार्थ सारथी बिस्वाल को भी गिरफ्तार किया था। उनकी कंपनी पर भी 8 प्रतिशत कमीशन लेकर फर्जी बीजी जारी करने का गंभीर आरोप था। इसके बाद, 11 अक्टूबर को, ईडी ने रिलायंस पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ), अशोक कुमार पाल को भी हिरासत में लिया, जिन्हें जांच एजेंसी ने इस पूरी धोखाधड़ी का “मुख्य साजिशकर्ता” करार दिया है।
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