आंकड़ों की जुबानी एक कड़वी हकीकत सामने रखते हुए उन्होंने कहा, “छठी कक्षा में छात्रवृत्ति पाने वाली 13,67,897 बेटियों का कारवां नौवीं तक पहुंचते-पहुंचते 7,06,123 पर सिमट जाता है। यानी हाई स्कूल की दहलीज तक आते-आते करीब 48% बेटियां सिस्टम से ओझल हो जाती हैं। शिक्षा के सफर में यह गिरावट यहीं नहीं रुकती; 11वीं में केवल 2,72,443 और 12वीं तक मात्र 1,56,378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की हकदार रह जाती हैं।“
सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, “यह साफ है कि बीजेपी सरकार का बेटियों को एक लाख रुपये देने का दावा सिर्फ एक चुनावी ‘हवाबाजी’ था। सच्चाई यह है कि न तो वे बेटियों की शिक्षा को लेकर गंभीर हैं और न ही उन्हें ‘लाड़ली लक्ष्मी’ के रूप में वह राशि देना चाहते हैं जिसका उन्होंने वादा किया था।“
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