चुनाव की गति धीमी, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता; महाराष्ट्र सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति कांत ने राज्य के अधिकारियों को पहले दी गई समय-सीमा की याद दिलाते हुए कहा, “क्या चुनाव हो चुके हैं? आदेश मई में पारित किया गया था, चुनाव चार महीने में होने थे।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की निष्क्रियता और देरी उसकी अक्षमता को दर्शाती है।
महाराष्ट्र सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने परिसीमन प्रक्रिया जारी रहने का हवाला देते हुए समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। हालांकि, पीठ इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये मुद्दे तब भी ज्ञात थे जब पहला आदेश पारित किया गया था।
राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने स्वीकार किया कि वर्तमान में 65,000 ईवीएम उपलब्ध हैं, जबकि 50,000 ईवीएम की अभी भी आवश्यकता है और उनका ऑर्डर दे दिया गया है। वहीं, महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि राज्य में पहली बार एक साथ 29 नगर निगमों के चुनाव कराए जाने हैं, जिसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
इन तर्कों के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों से असहमति जताते हुए 26 जनवरी 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने का आदेश दिया है। कोर्ट का यह आदेश चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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