नोएडा: शिक्षा विभाग की ‘लेट-लतीफी’ ने कड़ाके की ठंड में बच्चों और अभिभावकों को किया बेहाल, छुट्टी के आदेश में देरी पर मचा बवाल।

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नोएडा: शिक्षा विभाग की 'लेट-लतीफी' ने कड़ाके की ठंड में बच्चों और अभिभावकों को किया बेहाल, छुट्टी के आदेश में देरी पर मचा बवाल।
नोएडा में शिक्षा विभाग की लापरवाही, ठंड के चलते स्कूल छुट्टी का आदेश देर से जारी, बच्चों-अभिभावकों को हुई परेशानी

गौतमबुद्धनगर: जब बच्चे स्कूल पहुँच गए, तब पहुँचा छुट्टी का आदेश; कड़ाके की ठंड में अभिभावकों और मासूमों की भारी फजीहत

गौतमबुद्धनगर में हाड़ कंपा देने वाली ठंड और घने कोहरे के बीच जिला प्रशासन का एक ‘देर आयद’ फैसला अभिभावकों के लिए राहत के बजाय मुसीबत का सबब बन गया। 16 और 17 जनवरी को नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के छात्रों के लिए घोषित अवकाश का आदेश समय पर न मिल पाने के कारण शुक्रवार सुबह सड़कों और स्कूलों में भारी अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय द्वारा यह आदेश शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे जारी किया गया, लेकिन तब तक अधिकांश बच्चे घने कोहरे को चीरते हुए अपने स्कूलों की दहलीज लांघ चुके थे। जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत जारी इस सूचना में कहा गया कि भीषण ठंड, कोहरा और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जनपद के सभी परिषदीय, अशासकीय, राजकीय और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में नर्सरी से आठवीं तक की कक्षाएं 16 और 17 जनवरी 2026 को बंद रहेंगी।

आदेश में यह भी स्पष्ट था कि छुट्टी केवल छात्रों के लिए है, जबकि शिक्षक और अन्य कर्मचारी विद्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। विडंबना यह रही कि जब तक यह पत्र प्रसारित हुआ, तब तक कई स्कूलों में प्रार्थना सभा की तैयारी शुरू हो चुकी थी और अभिभावक अपने बच्चों को रोजमर्रा की तरह स्कूल छोड़ चुके थे।

प्रशासन की इस लेटलतीफी पर अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका तर्क है कि जब शीतलहर और कम दृश्यता की चेतावनी पहले से ही थी, तो निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों की गई? कई माता-पिता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शून्य दृश्यता के बीच बच्चों को स्कूल ले जाना जोखिम भरा था, लेकिन आधिकारिक सूचना के अभाव में वे मजबूर थे।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक तालमेल और सूचना तंत्र की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब अभिभावकों और शिक्षाविदों की यह पुरजोर मांग है कि भविष्य में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे संवेदनशील निर्णय समय रहते लिए जाएं, ताकि मासूमों की सेहत और अभिभावकों के धैर्य की ऐसी ‘अग्निपरीक्षा’ दोबारा न हो।

आईएएनएस के इनपुट के साथ


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