साजिश का पर्दाफाश: प्रज्ञा ठाकुर और 6 अन्य को नोटिस, NIA की भूमिका पर भी सवाल

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साजिश का पर्दाफाश: प्रज्ञा ठाकुर और 6 अन्य को नोटिस, NIA की भूमिका पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी 7 आरोपियों को नोटिस जारी किया, NIA से भी मांगा जवाब

मालेगांव धमाका: बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर सहित सात आरोपियों को जारी किया नोटिस, 6 हफ्तों में मांगा जवाब

छह पीड़ित परिवारों की याचिका पर NIA भी तलब, निचली अदालत के फैसले को दी गई है चुनौती

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2008 के मालेगांव धमाका मामले में निचली अदालत द्वारा बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी सात आरोपियों को बरी करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने उन्हें छह हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी नोटिस जारी किया गया है।

यह अहम नोटिस धमाके में मारे गए छह लोगों के परिवारों द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में आया है, जिन्होंने विशेष NIA अदालत के फैसले को चुनौती दी है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ के समक्ष हुई।

याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु:

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि जांच प्रक्रिया में हुई कुछ गलतियों या खामियों के आधार पर आरोपियों को बरी नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, यह भी दावा किया गया है कि विस्फोट की साजिश के दौरान गोपनीयता बरती गई थी, जिसके कारण प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके।

अपील के अधिकार पर हाई कोर्ट की पूर्व टिप्पणी:

इससे पूर्व, 16 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने का अधिकार सभी को नहीं होता। यह अधिकार केवल उन्हीं लोगों को है जो ट्रायल के दौरान गवाह रहे हों या सीधे तौर पर पीड़ित पक्ष से जुड़े हों।

निचली अदालत का फैसला और अपीलकर्ताओं का तर्क:

गौरतलब है कि 31 जुलाई को विशेष NIA अदालत ने मालेगांव धमाका मामले के सभी सात आरोपियों, जिनमें पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल थे, को बरी कर दिया था। अपीलकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया था कि अदालत को केवल मूकदर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए था। यदि आवश्यकता होती, तो अदालत को सवाल पूछने और अतिरिक्त गवाहों को बुलाने जैसे अपने अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए था।

मामले पर अगली सुनवाई:

मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट में बुधवार को फिर से सुनवाई होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि पीड़ित परिवारों की अपील सुनवाई योग्य है या नहीं और ट्रायल में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही थी।

मालेगांव धमाके का संक्षिप्त विवरण:

29 सितंबर, 2008 की शाम को महाराष्ट्र के नासिक जिले के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील शहर मालेगांव में भिक्कू चौक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर बंधे बम में विस्फोट हुआ था। रमजान के दौरान और नवरात्रि से कुछ दिन पहले हुए इस भीषण आतंकी हमले में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। मुंबई आतंकी हमले के दौरान शहीद हुए तत्कालीन ATS चीफ हेमंत करकरे ने इस मामले की जांच की थी और प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी आरोपियों की भूमिका का खुलासा किया था। बाद में, इस मामले की जांच NIA को सौंप दी गई थी।


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