तानाशाही के साये में लोकतंत्र: संसद में चर्चा से इनकार पर तीखा प्रहार
“यह सिर्फ फोन पर ताक-झांक का मामला नहीं है,” एक तीखी टिप्पणी के साथ उन्होंने सरकार पर देश को हर मोर्चे पर तानाशाही की ओर धकेलने का गंभीर आरोप लगाया। उनके अनुसार, संसद का कामकाज ठप पड़ा है क्योंकि सरकार किसी भी ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा करने से कतरा रही है। उन्होंने कहा, “विपक्ष पर उंगली उठाना तो आसान है, लेकिन सच्चाई यह है कि वे किसी भी विषय पर संवाद की अनुमति नहीं दे रहे हैं, और यह किसी भी मायने में लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक जीवंत और स्वस्थ लोकतंत्र की नींव चर्चा पर टिकी होती है। यह वही मंच है जहाँ विभिन्न विचारों का जन्म होता है और जहाँ सरकारों की जिम्मेदारी बनती है कि वे जनता की आवाज़ सुनें और उनकी विविधताओं का सम्मान करें।
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