2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सूबे की सियासत में एक बड़ा भूचाल आया है। अमृतसर उत्तर से ‘आप’ विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोमवार को अचानक पंजाब विधानसभा से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि कुंवर विजय प्रताप सिंह को 29 जून, 2025 को आम आदमी पार्टी (AAP) से सस्पेंड कर दिया गया था। अमृतसर की जनता के नाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि वह जनता के प्यार और सम्मान के लिए ‘अपनी आखिरी सांस तक’ उनके शुक्रगुजार रहेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने ‘गलियों और रिबन काटने की राजनीति’ से ऊपर उठने का आह्वान किया। पंजाब की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने इसे “ड्रग्स, जबरन वसूली, गैंगस्टरवाद और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा हुआ” करार दिया और इसे एक प्रगतिशील राज्य बनाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की।
सिंह ने दावा किया कि एक विधायक के तौर पर उन्होंने अपने 90 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, और साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पार्षद, मेयर और सांसद की भूमिकाएं इससे बिल्कुल अलग होती हैं। राजनीति में ‘माई-बाप’ कल्चर को नेस्तनाबूद करना उन्होंने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि उन्होंने हमेशा जनता को ही अपनी प्रेरणा मानकर काम किया है। उन्होंने अपने सफर को याद करते हुए कहा, ‘पंजाब विधानसभा में, मैंने हमेशा अमृतसर के लोगों की जोरदार आवाज उठाई। पानी-सीवेज से लेकर सर्किट हाउस, कंपनी बाग, गंदे नाले, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, सरकारी मेडिकल कॉलेज, सरूप रानी कॉलेज और बरगारी बेअदबी जैसे गंभीर मामलों को मैंने पूरी हिम्मत के साथ सदन में उठाया। यह इतिहास में पहली बार हुआ जब मैंने पंजाब विधानसभा में गलियों और मोहल्लों का नाम लेकर इलाके के बेहद खास और जमीनी मुद्दे उठाए।’ आगे की रणनीति का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, ‘आपके साथ मिलकर आगे का रास्ता तय करते हुए, मेरा मुख्य मकसद साफ़-सुथरी राजनीति और पारदर्शी प्रशासन (ट्रांसपेरेंट एडमिनिस्ट्रेशन) सुनिश्चित करना होगा।’ उन्होंने दो टूक कहा, ‘मेरा एकमात्र और अंतिम उद्देश्य ‘पंजाब फर्स्ट’ है। इसके अलावा मेरा कोई भी निजी स्वार्थ (पर्सनल इंटरेस्ट) नहीं है।’
इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते दो अन्य विधायकों, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा को भी पार्टी से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के तुरंत बाद, दोनों नेताओं ने भी ‘आप’ से इस्तीफा दे दिया। उधर, आम आदमी पार्टी ने साफ किया है कि वह इन दोनों नेताओं की विधानसभा सदस्यता रद्द (डिसक्वालिफाई) कराने के लिए विधानसभा स्पीकर के पास औपचारिक अर्जी देगी। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनावों में ‘आप’ ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए राज्य की 117 में से 92 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की थी, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को मात्र 18 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।
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