फणीश्वरनाथ रेणु की कहानियों से आज के पूर्णिया तक: एक कायापलट की दास्तां
महान उपन्यासकार और कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी रचनाएं, जैसे ‘मारे गए गुलफाम’ में ‘हीरामन की बैलगाड़ी’ का हृदयस्पर्शी चित्रण, और ‘मैला आंचल’ में पूर्णिया की वास्तविक, अनगढ़ तस्वीर, आज भी साहित्य प्रेमियों के मानस पटल पर अंकित हैं। यह अतीत की पूर्णिया का वह रूप था, जो गरीबी, धूल भरी सड़कों और बैलगाड़ियों के इर्द-गिर्द घूमता था। लेकिन, समय का पहिया घूम चुका है, और आज का पूर्णिया एक नई इबारत लिख रहा है। फणीश्वरनाथ रेणु की कहानियों में चित्रित पूर्णिया और आज के आधुनिक पूर्णिया के बीच की यह दूरी, इस क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विकास का प्रमाण है।
बदहाली से विकास की ओर: पूर्णिया का नव-निर्माण
लगभग दो दशक पूर्व, पूर्णिया की पहचान अक्सर गरीबी, पिछड़ेपन और गांवों की कच्ची सड़कों पर दौड़ती बैलगाड़ियों से होती थी। यह वह दौर था जब जिले का विकास गतिहीन सा प्रतीत होता था। परंतु, वर्तमान एनडीए सरकार के कार्यकाल में पूर्णिया ने कायापलट का अनुभव किया है। सरकार की दूरगामी नीतियों और विकासोन्मुख योजनाओं ने जिले को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। आज पूर्णिया की पहचान सिर्फ बैलगाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हवाई अड्डों, एक्सप्रेसवे और वंदे भारत जैसी आधुनिक सुविधाओं का गवाह बन रहा है।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे: बिहार का गौरव, राज्य की सीमा के भीतर पहला
सड़क संपर्क को सुदृढ़ करने की दिशा में, पूर्णिया को एक बड़ी सौगात मिली है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-9 (एनई-9) का दर्जा दिया है। यह सड़क परियोजना बिहार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सबसे खास बात यह है कि यह बिहार का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे होगा जो पूरी तरह से राज्य की सीमाओं के भीतर विकसित किया जाएगा। यह न केवल यात्रा को सुगम बनाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगा।
पूर्णिया एयरपोर्ट का नया अध्याय: उड़ान भरेगा विकास
हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। पटना, गया और दरभंगा के बाद, पूर्णिया बिहार का चौथा हवाई अड्डा बन गया है, जहां से व्यावसायिक उड़ानें संचालित होंगी। इस नई उड़ान से न केवल पूर्णिया, बल्कि कोसी, भागलपुर, पश्चिम बंगाल और नेपाल के लगभग दो करोड़ लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे, और विकास की गति तेज होगी।
वंदे भारत और अमृत भारत: पूर्णिया को मिली रेल की नई रफ्तार
यात्रियों की सुविधा के लिए, पूर्णिया जंक्शन से वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों का शुभारंभ किया गया है। पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने स्वयं हरी झंडी दिखाकर इन ट्रेनों को रवाना किया और वंदे भारत से बनमनखी तक की यात्रा करके जनता के साथ खुशी मनाई। सांसद ने इस अवसर पर कहा कि यह क्षण पूर्णिया, सीमांचल और कोशी क्षेत्र के लोगों की शक्ति, संघर्ष और लंबे संकल्प का परिणाम है, जो दशकों से उनके सपनों को साकार करने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
विकास की राह पर पूर्णिया: सुनहरे भविष्य की ओर अग्रसर
इन प्रमुख परियोजनाओं के अतिरिक्त, पूर्णिया को कई अन्य विकास परियोजनाओं की सौगात मिली है। पिछले 20 वर्षों में, पूर्णिया की सूरत में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। यह परिवर्तन लोगों के बीच उत्साह और खुशी का संचार कर रहा है। अब बैलगाड़ियों के युग का स्थान हवाई जहाज ले रहे हैं। पूर्णिया से कोलकाता की यात्रा मात्र 70 मिनट में, अहमदाबाद की 2 घंटे में और दिल्ली की यात्रा भी बहुत कम समय में संभव होगी। इस प्रकार, जिले में निरंतर विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो एक उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
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