‘भारत-पाकिस्तान एक नहीं’: डेटा और तकनीक की वैश्विक जंग में राहुल गांधी का नया विजन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते साये के बीच दुनिया एक ऐसे दौर में कदम रख रही है, जो जितना रोमांचक है उतना ही चुनौतीपूर्ण। राहुल गांधी ने आगाह किया है कि 140 करोड़ भारतीयों के भविष्य पर मंडराते इन खतरों से निपटने के लिए हमारे पास ठोस नीतियों की भारी कमी है। उन्होंने मौजूदा बजट पर निशाना साधते हुए कहा कि डेटा और तकनीक जैसे निर्णायक विषयों पर सरकार का रुख पूरी तरह अस्पष्ट है।
राहुल गांधी के अनुसार, आज के दौर में डॉलर और ऊर्जा महज संसाधन नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक हथियार’ बन चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अमेरिका अपनी महाशक्ति की साख और डॉलर का वैश्विक वर्चस्व बचाए रखना चाहता है, तो उसे भारतीय डेटा की अपार शक्ति की आवश्यकता होगी। भारत का डेटा उसकी सबसे बड़ी संपत्ति है, जिसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका के साथ किसी भी संवाद की शुरुआत डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा से होनी चाहिए। राहुल गांधी का मानना है कि भारत को एक ‘अधीनस्थ’ के बजाय ‘बराबरी’ के अधिकार से अपनी बात रखनी चाहिए। बातचीत की मेज पर सबसे पहले डेटा, फिर ऊर्जा सुरक्षा और उसके बाद कृषि व किसानों के हितों को मजबूती से पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की क्षमता और वैश्विक स्थिति अद्वितीय है, इसलिए हमें खुद को पाकिस्तान के बराबर रखकर नहीं देखना चाहिए। भारत को अपनी डेटा संपदा और अन्नदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनानी होगी।
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