खूंखार बाघ का अंत: सीतापुर में महोली की जनता को मिली राहत!
सीतापुर जिले के महोली थाना क्षेत्र में रविवार शाम को घनी आबादी वाले इलाकों में खौफ का सबब बने बाघ को आखिरकार वन विभाग की टीम ने अपने शिकंजे में कस लिया। यह खबर आबादी वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है।
नरनी गांव के गन्ने के खेतों से दबोचा गया खूंखार शिकारी
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) नवीन खंडेलवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताते हुए कहा कि नरनी गांव के पास स्थित गन्ने के खेतों से इस नर बाघ को पकड़ा गया है। यह वही बाघ है जिसने 22 अगस्त को इसी नरनी गांव के एक युवक की जान ले ली थी, जिसके बाद से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सतर्क थे।
निरंतर निगरानी और चालाक रणनीति का नतीजा
वन विभाग ने इस खतरनाक शिकारी का पता लगाने के लिए अथक प्रयास किए। लगातार निगरानी कैमरों की मदद से बाघ की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही थी। जिन इलाकों में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी, वहां खास तौर पर चारा डालकर उसे जाल में फंसाने की योजना बनाई गई थी।
ट्रैंकुलाइजर गन का कमाल: साढ़े छह बजे हुआ ऑपरेशन सफल
डीएफओ खंडेलवाल ने बताया कि आज शाम करीब साढ़े छह बजे वन विभाग की टीम को आखिरकार बाघ का दीदार हुआ। बिना किसी जोखिम के, ट्रैंकुलाइजर गन (बेहोश करने वाली बंदूक) की मदद से बाघ को बेहोश किया गया और फिर उसे सुरक्षित पिंजरे में डाल दिया गया।
बाघ स्वस्थ, भविष्य का फैसला वन्यजीव टीम करेगी
फिलहाल, बाघ पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे कड़ी निगरानी में रखा गया है। कल वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम आगे की जांच और निरीक्षण के लिए यहां पहुंचेगी। यह टीम ही तय करेगी कि पकड़े गए इस खूंखार जानवर के साथ आगे क्या कार्रवाई की जाए। इस घटना ने महोली थाना क्षेत्र में व्याप्त भय को काफी हद तक कम कर दिया है।
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