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नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिनमें प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस की कथित बर्बरता को चुनौती दी गई है।
गौरतलब है कि नीट प्रश्नपत्र लीक की आग कई राज्यों तक फैल चुकी थी, जहाँ आक्रोशित छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी कड़ी में, 20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर भारी हंगामा देखने को मिला था। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर कूच कर रहे थे, तब सुरक्षा बलों के साथ उनकी तीखी झड़प हुई। भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी दागे थे।
इन प्रदर्शनकारियों की सबसे प्रमुख मांग नीट मामले की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी।
आखिरकार, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही 36 दिनों से चला आ रहा यह लंबा आंदोलन समाप्त हो गया। सरकार द्वारा अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद सीजेपी ने अपना प्रदर्शन वापस ले लिया है। अपने इस्तीफे की घोषणा के दौरान प्रधान ने भावुक होते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उनके “मन को बहुत दुखी” किया है और यह पूरा मुद्दा उनकी “व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं” है।
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