बिहार चुनाव में हार के बाद राजद की समीक्षा बैठक: ‘परिणाम चौंकाने वाला, साजिश की आशंका’
तेजस्वी यादव फिर बने विधानमंडल दल के नेता, पार्टी में मंथन जारी
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में सोमवार को गहन मंथन हुआ। महागठबंधन के मुख्य घटक दल की इस बैठक में जहां तेजस्वी यादव को सर्वसम्मति से विधानमंडल दल का नेता चुना गया, वहीं चुनाव परिणामों पर गंभीर सवाल भी उठाए गए। बैठक के उपरांत आरजेडी नेताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए हार को “चौंकाने वाला” और “षड्यंत्र का परिणाम” बताया।
‘गड़बड़ी के बिना ऐसा परिणाम संभव नहीं’
आरजेडी नेता संजीव कुमार ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा, “यह परिणाम होना ही नहीं था। बिना किसी गड़बड़ी के ऐसा परिणाम नहीं आ सकता।” उन्होंने साफ संकेत दिया कि पार्टी चुनाव परिणामों को लेकर कानूनी रास्ता अपनाने पर विचार कर रही है। “कोर्ट जाने को लेकर भी योजना बनाई जा रही है,” संजीव कुमार ने जोड़ा। उन्होंने कहा कि बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं को फिर से संगठन को मजबूत करने और एकजुट होने का निर्देश दिया गया है।
‘लोकतंत्र व्यापार नहीं, परिणाम में गड़बड़ी हुई’
इसी कड़ी में, आरजेडी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने भी चुनाव परिणामों में गड़बड़ी की आशंका जताई। उन्होंने कहा, “चुनाव परिणाम में गड़बड़ी हुई है। बैठक में इसे लेकर समीक्षा की गई।” जगदानंद सिंह ने जोर देकर कहा, “लोकतंत्र व्यापार नहीं हो सकता है।” उनके अनुसार, किसी को भी पार्टी की ऐसी दुर्दशा का अंदाजा नहीं था।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
तेजस्वी यादव को फिर से विधायक दल का नेता चुनने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में विजयी और पराजित दोनों ही उम्मीदवार उपस्थित रहे। आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें अध्यक्ष लालू प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और मीसा भारती जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे, ने भी बैठक में शिरकत की।
महागठबंधन का प्रदर्शन: निराशाजनक
हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनावों में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। आरजेडी को 25 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, जबकि सहयोगी दल कांग्रेस को मात्र छह सीटें मिलीं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन ने दो सीटें जीतीं, वहीं इंडियन इन्क्लुसिव पार्टी और सीपीएम के खाते में एक-एक सीट आई। चुनाव में विकासशील इंसान पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका। यह प्रदर्शन महागठबंधन के लिए निश्चित रूप से निराशाजनक रहा है।
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