
सोनम वांगचुक का महा-अनशन: शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की जिद, 18 दिनों से जारी है ‘अहिंसक जंग’ : देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रख्यात शिक्षाविद सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। उनके इस संघर्ष को धार देने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए देशभर के छात्र समुदाय से 16 जुलाई को एक दिवसीय भूख हड़ताल में शामिल होने की पुरजोर अपील की है। CJP का मानना है कि यह सामूहिक एकजुटता न केवल सरकार पर दबाव बनाएगी, बल्कि सोनम वांगचुक के अडिग संकल्प के प्रति राष्ट्र का समर्थन भी प्रदर्शित करेगी।
संवादहीनता का दौर: केंद्र की खामोशी पर CJP ने उठाए सवाल
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि अनशन के इतने दिन बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार की ओर से वार्ता की कोई गंभीर पहल नहीं की गई है। एक तरफ जहां अरविंद केजरीवाल समेत कई विपक्षी दिग्गज सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह कर रहे हैं, वहीं सोनम का रुख स्पष्ट है। अभिजीत के अनुसार, सोनम ने संदेश दिया है कि शुभचिंतकों को उनसे अनशन तोड़ने की अपील करने के बजाय सरकार पर बातचीत शुरू करने का दबाव बनाना चाहिए।
क्यों सुलग रही है विरोध की आग? पेपर लीक और छात्रों का दर्द
सोनम वांगचुक के इस कड़े कदम के पीछे देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य जुड़ा है। मेडिकल परीक्षा NEET 2026 में पेपर लीक की त्रासदी ने देश को झकझोर दिया, जिसके चलते करीब 20 मेधावी छात्रों ने मौत को गले लगा लिया। दोबारा परीक्षा के बावजूद अव्यवस्थाओं का आलम यह रहा कि छात्रों को अपने परीक्षा केंद्र तक ढूंढने में जद्दोजहद करनी पड़ी। लेकिन यह आक्रोश सिर्फ NEET तक सीमित नहीं है। 2024 में UGC-NET, CBSE बोर्ड, यूपी टेट (2021), यूपी पुलिस कांस्टेबल (2024) और UKSSSC (2025) जैसी परीक्षाओं में सेंधमारी ने छात्रों के मनोबल को तोड़ दिया है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के डरावने आंकड़े बताते हैं कि 2019 से 2024 के बीच देश में 65 से ज्यादा पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। इसी जवाबदेही और तंत्र की सफाई के लिए CJP का धरना 26 दिनों से और सोनम का अनशन 18 दिनों से जारी है।
लद्दाख का हक: छठे शेड्यूल की अधूरी आस
शिक्षा सुधार के साथ-साथ सोनम वांगचुक की इस लड़ाई में लद्दाख की अस्मिता का मुद्दा भी गहराई से जुड़ा है। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर वे पहले भी 22 दिनों का अनशन कर चुके हैं। हालांकि, सरकारी तंत्र ने इस दिशा में बातचीत का आश्वासन दिया था, लेकिन सोनम का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस और सकारात्मक परिणाम नजर नहीं आए हैं।
गिरती सेहत, बढ़ती चिंता: 18वें दिन 9 किलो घटा वजन
अभिजीत दीपके और CJP के प्रवक्ताओं ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती शारीरिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। 15 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार, 18 दिनों के अनशन के बाद सोनम का वजन लगभग 9 किलोग्राम कम हो चुका है और उनका शुगर लेवल गिरकर 60-65 के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक विचलित करने वाले वीडियो में सोनम वजन कराते समय इतने कमजोर दिखे कि वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे, जिसे देख देशभर के लोग उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।
सियासी समर्थन: जंतर-मंतर पहुंचेंगे अरविंद केजरीवाल
इस आंदोलन को अब बड़ा राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि वे 16 जुलाई को खुद धरना स्थल पर पहुंचेंगे। इससे पहले संजय सिंह और आतिशी सहित ‘आप’ के कई शीर्ष नेता पहले ही सोनम वांगचुक की मांगों और उनके प्रदर्शन को अपना समर्थन दे चुके हैं।
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