
Salim Kumar Death: मलयालम सिनेमा का एक चमकदार सितारा हमेशा के लिए खामोश हो गया। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता और निर्देशक सलीम कुमार का 6 जून की रात 56 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कोच्चि के एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे सलीम कुमार ने शनिवार रात दिल का दौरा पड़ने के बाद अंतिम सांस ली। आइए, बहुमुखी प्रतिभा के धनी इस कलाकार के सफर पर एक नजर डालते हैं।
लंबे समय से बीमारियों से संघर्ष कर रहे थे सलीम कुमार
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सलीम कुमार पिछले कई सालों से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे थे। वह लिवर सिरोसिस, किडनी की बीमारियों और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से पीड़ित थे। उनका लिवर ट्रांसप्लांट भी हो चुका था, लेकिन स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव जारी रहा। शनिवार को उनकी स्थिति नाजुक होने पर उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद कार्डियक अरेस्ट ने उनसे जीवन छीन लिया।
सुपरस्टार ममूटी का भावुक विदाई संदेश
सलीम कुमार के जाने से फिल्म जगत स्तब्ध है। सुपरस्टार ममूटी ने एक बेहद भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “वह इंसान जो खुद हंसता था, दुनिया को हंसाता था और अपनी बातों से सोचने पर मजबूर कर देता था… जो कभी खुद रोता था और दूसरों को भावुक करता था, आज वह हमें सिर्फ रुलाकर चला गया है। भाई, तुम्हारा जाना एक ऐसा शून्य है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।”
ചിരിക്കുകയും ചിരിപ്പിക്കുകയും ചിന്തിക്കുകയും ചിന്തിപ്പിക്കുകയും
ഇടയ്ക്ക് കരയുകയും കരയിപ്പിക്കുകയും ചെയ്ത സലീം
നി ഇപ്പോൾ കരയിപ്പിക്കുക മാത്രമാണ്………..
തീരാത്ത സങ്കടം ആയി സഹോദരാ നിന്റെ വിയോഗം… pic.twitter.com/954P7IBhcw
— Mammootty (@mammukka) June 6, 2026
विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने दी श्रद्धांजलि
विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने सलीम कुमार को याद करते हुए उन्हें एक निडर व्यक्तित्व बताया। उन्होंने लिखा, “मेरे लिए सलीम कुमार सिर्फ ‘हंसी के राजकुमार’ नहीं थे, बल्कि एक बेहद संवेदनशील और गहरे जुड़े हुए इंसान थे। वह कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा और अपने राजनीतिक विचारों को बिना किसी डर के व्यक्त करते थे। वह एक ऐसे विलक्षण कलाकार थे जो अपने चेहरे के भावों से पल भर में हंसा सकते थे और अगले ही पल रुला सकते थे। मलयालम सिनेमा ने एक लीजेंड खो दिया है और मैंने अपना भाई।”
He wasn’t just the prince of laughter to me — #SalimKumar was a deeply connected soul, fearless in his political beliefs and proud to say he stood with Congress. A versatile genius who could make us laugh and cry with the same face. Malayalam cinema lost a legend, and I lost a… pic.twitter.com/H0tx6RulC6
— V D Satheesan (@vdsatheesan) June 6, 2026
मिमिक्री के मंच से नेशनल अवॉर्ड तक का सफर
सलीम कुमार का करियर थिएटर और मिमिक्री के मंचों से शुरू हुआ था। 1997 में फिल्म ‘इष्टमानु नूरु वट्टम’ से बड़े पर्दे पर कदम रखने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘थेंकासीपट्टणम’, ‘सी.आई.डी. मूसा’, ‘मीसा माधवन’ और ‘मायावी’ जैसी अनगिनत हिट फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। साल 2010 में आई फिल्म ‘आदमिन्टे मकन अबू’ ने उन्हें अभिनय के शिखर पर पहुंचाया, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। अभिनय के अलावा उन्होंने ‘करुथा जूथन’ जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया था।
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