जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच’ का हल्लाबोल: नीट और सीबीएसई विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की गूंज
दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बन रहा है। इस बार मोर्चा संभाला है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने, जो परीक्षाओं में हो रही लगातार धांधलियों के खिलाफ सड़क पर उतरी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचे, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया है। प्रदर्शनकारियों की एक ही प्रमुख मांग है— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा।
नीट पेपर लीक और सीबीएसई के सिस्टम पर सवाल
नीट-यूजी (NEET UG) पेपर लीक मामले ने देश के युवाओं में भारी हताशा और आक्रोश पैदा कर दिया है, जिससे शिक्षा मंत्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विवाद केवल यहीं तक सीमित नहीं है; सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम, जिसका उपयोग कक्षा 12वीं की कॉपियों के मूल्यांकन और री-इवैल्यूएशन में किया गया था, उसमें भी बड़ी खामियां पाई गईं। विवाद बढ़ता देख प्रशासन ने एक्शन लेते हुए सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है।
सोनम वांगचुक का समर्थन: आंदोलन को मिली नई ताकत
इस प्रदर्शन को लद्दाख के प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का भी साथ मिला है। वांगचुक, जिन्हें सितंबर में गिरफ्तार कर छह महीने तक हिरासत में रखा गया था, उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर एलान किया कि वे 6 जून को दिल्ली के इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। वांगचुक का मानना है कि जब व्यवस्था में इतनी बड़ी गड़बड़ियां हो रही हैं, तो नैतिक आधार पर जिम्मेदार मंत्री को पद त्याग देना चाहिए।
क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और कौन हैं इसके रणनीतिकार?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का नाम जितना अजीब है, इसके पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प है। दरअसल, एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस द्वारा कुछ लोगों को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के बाद प्रतीकात्मक रूप से इस पार्टी का सोशल मीडिया अकाउंट बनाया गया था।
इसके सूत्रधार 30 वर्षीय अभिजीत दिपके हैं, जो महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। दिपके की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है; उन्होंने पुणे से जर्नलिज्म की डिग्री ली और फिर बोस्टन यूनिवर्सिटी (USA) से पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया। राजनीति और सोशल मीडिया की उन्हें गहरी समझ है, क्योंकि 2020 से 2023 के बीच वे आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया मैनेजमेंट और चुनावी अभियानों का अहम हिस्सा रह चुके हैं।
यह आंदोलन अब न केवल परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए एक बड़ा मंच बन गया है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


