पाकिस्तान का ‘दो मोर्चों पर युद्ध’ का बयान: क्या है असली डर?
पाकिस्तान इन दिनों एक अजीब कश्मकश में फंसा है। जहाँ एक ओर अफगानिस्तान के साथ सीमा पर लगातार भिड़ंतें हो रही हैं, वहीं भारत को लेकर भी आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। इस नाज़ुक समय में, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक बयान आया है, जिसने पूरे माहौल को और भी गरमा दिया है। आसिफ ने दावा किया है कि उनका देश “दो मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार” है। इसका सीधा मतलब है कि एक तरफ अफगान सीमा पर गोलियों की गूँज और दूसरी तरफ भारत को लेकर शक का साया। आखिर पाकिस्तान किस डर से सहमा हुआ है?
भारत पर ‘गंदा खेल’ खेलने का आरोप
एक इंटरव्यू के दौरान, जिसका एक हिस्सा सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, ख्वाजा आसिफ ने भारत पर तालिबान संघर्ष के बीच “गंदा खेल” खेलने का गंभीर आरोप लगाया। उनके शब्दों में, “बिल्कुल, आप इससे इनकार नहीं कर सकते। इसकी प्रबल संभावनाएं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, तो आसिफ ने बस इतना कहा कि रणनीतियाँ तैयार हैं और वे उन पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं कर सकते, लेकिन पाकिस्तान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। यह स्पष्ट संकेत है कि इस्लामाबाद अपने पड़ोसियों की हर चाल पर बारीक नज़र रख रहा है।
भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’
भारत ने इसी साल मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए एक बर्बर आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इन हमलों के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के सदस्यों को जिम्मेदार ठहराया गया था। इस हमले को 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में हुआ सबसे घातक आतंकी हमला माना गया। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि उसके जवाबी हमले पूरी तरह से “सटीक” थे, जिसका अर्थ है कि केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया, न कि किसी भी नागरिक या सैन्य क्षेत्र को।
अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव
अब बात करते हैं पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर मचे घमासान की। दोनों देशों के बीच पहले भी कई बार झड़पें हो चुकी हैं, लेकिन इस बार का संघर्ष पिछले कई दशकों का सबसे गंभीर बताया जा रहा है। इस विवाद की जड़ें तब गहरी हुईं जब पाकिस्तान ने काबुल से मांग की कि वह उन आतंकवादियों पर नकेल कसे जो पाकिस्तान में लगातार हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि ये आतंकी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, तालिबान ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और पलटवार करते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान के बारे में गलत सूचना फैला रही है, सीमा पर तनाव बढ़ा रही है, और देश की संप्रभुता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। तालिबान ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि पाकिस्तान आईएसआईएस से जुड़े आतंकवादियों को पनाह दे रहा है, जिससे अफगानिस्तान की स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और हताहतों की संख्या
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने बताया है कि 10 अक्टूबर से जारी संघर्ष में कम से कम 18 नागरिकों की मौत हुई है और 360 से अधिक घायल हुए हैं। वहीं, पाकिस्तान का दावा है कि उसने इसी हफ्ते तीन अलग-अलग सैन्य अभियानों में 34 आतंकवादियों को मार गिराया है। यह स्पष्ट है कि सीमा पर स्थिति अत्यंत विस्फोटक बनी हुई है और दोनों देश एक-दूसरे पर दोषारोपण के खेल में उलझे हुए हैं।
शहबाज शरीफ का बयान: ‘बातचीत के लिए तैयार’
तनावपूर्ण माहौल के बीच, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को एक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ अपने विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तानी सेना अफगान सीमा पर सक्रिय अभियानों में जुटी हुई है। यह स्थिति कुछ हद तक विरोधाभासी लगती है, जहाँ एक तरफ रक्षा मंत्री युद्ध की तैयारी की बात कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री कूटनीतिक रास्ते की पेशकश कर रहे हैं। यह पाकिस्तान की अंदरूनी असहमति का भी संकेत हो सकता है।
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