ईरान का ट्रंप के दावों पर कड़ा पलटवार: “कोई समझौता नहीं हुआ, बंद रहेगा होर्मुज जलडमरूमध्य”
ईरान और अमेरिका के बीच दावों और प्रति-दावों की जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ एक संभावित समझौते के तहत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर सहमति जताई है। ईरान ने स्पष्ट किया कि धरातल पर ऐसा कोई समझौता अस्तित्व में नहीं है। ईरानी मीडिया ने ट्रंप के उस दावे को भी “एक और झूठ” करार दिया जिसमें कहा गया था कि तेहरान ने अमेरिका से सैन्य हमलों को रोकने की गुहार लगाई थी। ईरान का कड़ा रुख है कि जब तक अमेरिका की “दुश्मनी भरी कार्रवाई” जारी रहेगी, यह रणनीतिक जलमार्ग बंद ही रहेगा।
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ईरान की अर्ध-सरकारी ‘फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी’ ने बातचीत करने वाली टीम के करीबी सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कोई सहमति नहीं बनी है। एजेंसी के मुताबिक, जानकार सूत्रों ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियां नहीं बदलता, तब तक इस जलमार्ग के खुलने की कोई संभावना नहीं है।
इससे पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों की मध्यस्थता से ईरान के साथ पिछले पांच महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा तैयार कर ली गई है। ट्रंप ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वह फिलहाल ईरान पर किसी नए सैन्य हमले का आदेश नहीं देंगे। उनके मुताबिक, इस प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल खोलना और ईरान के परमाणु खतरे का पूर्ण समाधान शामिल है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दुनिया के भविष्य और एक समृद्ध ईरान के हित को देखते हुए हमलों को रोकने पर सहमति दी है, बशर्ते जल्द ही कोई ठोस समझौता हो जाए।
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गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार सैन्य कार्रवाई रोकने की बात कर चुके हैं, लेकिन हर बार तनाव फिर से चरम पर पहुंच जाता है। ईरान के रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रंप की इन घोषणाओं से ईरान न तो हैरान है और न ही किसी तरह की ढिलाई बरत रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी धमकियों के बीच ईरानी सेना पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद है। वहीं, क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ट्रंप द्वारा घोषित इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य उन लंबित मुद्दों पर वार्ता फिर से शुरू करना है, जिनकी वजह से पूर्व में समझौते की कोशिशें विफल रही थीं।
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