एच-1बी वीज़ा: अमेरिका की चाल, भारत के लिए बाजी – ट्रम्प को लगा तगड़ा झटका!
“जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वो खुद उसी में गिरता है।” यह कहावत आज अमेरिका पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। जहां एक ओर आज का दिन भारत के लिए शानदार जीत लेकर आया है, वहीं अमेरिका के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ है। जिस एच-1बी वीज़ा शक्ति को अमेरिकी सरकार अपनी जीत मान रही थी, वह अब उनके ही गले का फंदा बन गई है।
टेक्नोलॉजी दिग्गजों का खुला विद्रोह, भारत की ओर झुकाव!
यह कोई छोटी बात नहीं है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, डेल, एलजी जैसी दिग्गज कंपनियों ने ट्रम्प के फैसले को हवा में उड़ा दिया है। उनका सीधा संदेश है: “अगर आप भारतीय प्रतिभा को रोकेंगे, तो हम अमेरिका नहीं, भारत जाएंगे।” कुछ महीने पहले ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीज़ा पर सख्ती बरतने और भारतीय इंजीनियरों को रोकने की सोची थी, ताकि कंपनियां मजबूरी में अमेरिका में ही फैक्ट्रियां लगाएं। लेकिन हुआ इसके ठीक उलट! इस अप्रत्याशित मोड़ ने ट्रम्प के भी होश ठिकाने ला दिए हैं।
मार्जोरी टेलर ग्रीन का दांव उल्टा पड़ा, ट्रम्प ने वापस लिया समर्थन!
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की करीबी और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने हाल ही में एक विधेयक लाने की बात कही थी, जिसके तहत एच-1बी वीज़ा का दुरुपयोग रोकने और इसे खत्म करने का प्रस्ताव था। रिपब्लिकन पार्टी से आने वाली मार्जोरी का आरोप था कि एच-1बी वीज़ा का दुरुपयोग हो रहा है और “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत इस वीज़ा कैटेगरी को समाप्त किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि अगले 10 सालों तक हर साल 10 हजार डॉक्टरों को एच-1बी वीज़ा जारी होंगे।
यह बयान उनके लिए महंगा साबित हुआ। अभी हर साल 85 हजार एच-1बी वीज़ा में से लगभग 70% वीज़ा भारतीयों को जारी होते हैं। इस पर डोनाल्ड ट्रम्प नाराज हो गए और उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर एक लंबा पोस्ट लिखकर मार्जोरी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। इतना ही नहीं, ट्रम्प ने रिपब्लिकन सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन का समर्थन भी वापस ले लिया।
ट्रम्प के बदल रहे सुर: “अमेरिकी प्रतिभा पर्याप्त नहीं!”
मार्जोरी को समर्थन वापस लेने के बाद ट्रम्प ने अपने पोस्ट में लिखा, “मैं महान राज्य जॉर्जिया की कांग्रेस वुमन मार्जोरी टेलर ग्रीन के प्रति अपना समर्थन और अनुमोदन वापस ले रहा हूं।” इससे पहले, 12 नवंबर को राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था, “अमेरिकियों के पास हर टैलेंट नहीं है, इसलिए एच-1बी वीज़ा जरूरी है।” इसी क्रम में, अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने 13 नवंबर को कहा था, “विदेशी स्किल्ड वर्कर आएं, ट्रेनिंग दें और लौट जाएं।” यह स्वीकारोक्ति उस सख्ती से बिल्कुल अलग है, जिसका रुख ट्रम्प प्रशासन पहले अपना रहा था। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रम्प सितंबर में एच-1बी वीज़ा फीस को 88 हजार रुपये से बढ़ाकर 88 लाख रुपये कर चुके थे।
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