इज़राइल-हमास युद्ध: बिपिन जोशी के परिवार का अंतहीन इंतज़ार और एक पिता का ख़्वाब
दो साल के लंबे इंतज़ार और युद्ध की विभीषिका के बीच, आखिरकार नेपाल के युवा बिपिन जोशी का पार्थिव शरीर उनके घर लौट आया है। इज़राइल और हमास के बीच सीज़फायर की घोषणा और कैदियों की अदला-बदली के बीच, बिपिन के परिवार के लिए यह एक मर्मस्पर्शी पल था, जिसने उस दर्द को और गहरा कर दिया जो वे पिछले 738 दिनों से झेल रहे थे। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकवादियों द्वारा इज़राइल से अगवा किए गए बिपिन, सोमवार को उन चार बंधकों में से एक थे जिनका शव हमास ने इज़राइल को सौंपा।
कौन थे बिपिन जोशी?
23 वर्षीय बिपिन जोशी, ‘लर्न एंड अर्न’ कार्यक्रम के तहत कृषि अध्ययन के लिए सितंबर 2023 में ही इज़राइल पहुंचे थे। यह उनका पहला विदेश प्रवास था। वे दक्षिण इज़राइल के किब्बुट्ज अलूमीम में एक सिट्रस फार्म में काम कर रहे थे। 7 अक्टूबर 2023 की उस भयावह सुबह, जब हमास के आतंकियों ने दक्षिण इज़राइल पर हमला किया, बिपिन अपने साथियों के साथ खेत में काम कर रहे थे। इस हमले में 10 नेपाली छात्र मारे गए, 5 घायल हुए और एक सुरक्षित बच निकला। बिपिन और एक थाई नागरिक को हमास ने बंधक बना लिया। गवाहों के अनुसार, बिपिन ने उस दिन अपनी जान की परवाह किए बिना, एक ग्रेनेड को हमलावरों की ओर फेंककर अपने साथियों की जान बचाने की कोशिश की थी। उनके इस अदम्य साहस ने कई जानें बचाईं, लेकिन वे स्वयं हमास के हत्थे चढ़ गए।
एक उम्मीद की किरण और फिर…
बिपिन के परिवार के लिए अगले दिन बेहद मुश्किल थे, उन्हें अपने बेटे की कोई खबर नहीं थी। उनकी 17 वर्षीय बहन पुष्पा जोशी, अपने गांव से 8 घंटे का सफर तय कर काठमांडू जाकर सरकारी अधिकारियों से भाई की रिहाई की गुहार लगातीं। नेपाल सरकार ने भी इज़राइल से संपर्क किया, पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला। नवंबर 2023 में, गाजा के एक अस्पताल से बिपिन से मिलते-जुलते व्यक्ति का एक 33 सेकंड का वीडियो सामने आया। वीडियो में बिपिन खुद को नेपाल का छात्र बताते हैं, “मेरा नाम बिपिन जोशी है, मैं नेपाल से हूँ, मेरी उम्र 23 वर्ष है, मैं ‘लर्न एंड अर्न’ कार्यक्रम के तहत आया हूँ।” यह वीडियो कुछ समय के लिए आशा की एक किरण लेकर आया, लेकिन यह उनकी जीवित स्थिति का अंतिम प्रमाण साबित नहीं हुआ।
अंतर्राष्ट्रीय अपीलें और अंततः…
अगस्त 2025 में, बिपिन का परिवार इज़राइल गया और राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। बिपिन की माँ ने भावुक होकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगाई, “हमारा दिल टूट चुका है। मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करती हूँ, कृपया जो भी हो सके कीजिए।” सितंबर में, परिवार न्यूयॉर्क गया ताकि संयुक्त राष्ट्र महासभा में बिपिन के मामले को उठाया जा सके। उस समय तक, बिपिन के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई थी। 13 अक्टूबर 2025 को, जब डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना के तहत 20 बंधकों की रिहाई पर सहमति बनी, परिवार को उम्मीद थी कि बिपिन उनमें शामिल होंगे, पर उनका नाम सूची में नहीं था।
अंततः, सोमवार शाम को, हमास ने 20 जीवित बंधकों के साथ चार शव भी लौटाए, जिनमें बिपिन जोशी का पार्थिव शरीर भी शामिल था। इज़राइली सेना ने औपचारिक रूप से नेपाली दूतावास को बिपिन के निधन की पुष्टि की। 26 अक्टूबर को 25 वर्ष के होने वाले बिपिन, अपने सपनों को साकार करने के लिए नेपाल से इज़राइल आए थे, लेकिन उनकी यात्रा एक दुखद अंत पर पहुंची।
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