लहरों पर तैरता चीन का नौसैनिक महाशक्ति का उदय: फुजियान, एक अभूतपूर्व सुपरकैरियर
समुद्र की अथाह गहराइयों में, एक तैरता हुआ शहर आकार ले रहा है, जो दर्जन भर से भी अधिक लड़ाकू विमानों, उन्नत रडार प्रणालियों और आसमान से लेकर समुद्र की तलहटी तक दुश्मन पर पैनी नज़र रखने की असाधारण क्षमता से सुसज्जित है। यह शक्ति है एक एयरक्राफ्ट कैरियर की। वर्षों से, अमेरिका इस क्षेत्र में निर्विवाद बादशाह रहा है, लेकिन अब चीन भी उसी राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। चीन की नौसेना का नवनिर्मित सुपरकैरियर, फुजियान (टाइप 003), चर्चा का विषय बना हुआ है और इस साल के अंत तक सेवा में शामिल होने की उम्मीद है। प्रश्न यह उठता है कि यह विशालकाय पोत इतना खास क्यों है, और भारत सहित पूरी दुनिया इसके आगमन से चिंतित क्यों है?
चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर: फुजियान की अनोखी पहचान
चीन के पास वर्तमान में दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं: लियाओनिंग और शानडोंग। फुजियान इन दोनों से कहीं अधिक उन्नत और विशिष्ट है। इसे चीन का पहला स्वदेशी (इंडिजिनस) सुपरकैरियर माना जा रहा है, जिसका अर्थ है कि इसे पूरी तरह से चीन ने स्वयं डिज़ाइन और निर्मित किया है। इसके कमीशन होने के बाद, चीन दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन जाएगा जिसके पास दो से अधिक एयरक्राफ्ट कैरियर होंगे। अब तक, यह विशिष्ट उपलब्धि केवल अमेरिका के नाम रही है।
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट से सुसज्जित: फुजियान की सबसे बड़ी ताक़त
फुजियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम (EMALS) है। यह अत्याधुनिक तकनीक वर्तमान में दुनिया में केवल अमेरिका के यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड पर ही उपलब्ध है। EMALS का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह जहाज को भारी और अधिक शक्तिशाली विमानों को भी अत्यंत तेज़ी से और कुशलता से लॉन्च करने की क्षमता प्रदान करता है। फुजियान की लंबाई 320 मीटर, चौड़ाई 78 मीटर और ड्राफ्ट 11.5 मीटर है। इसमें तीन कैटापल्ट्स, दो एलिवेटर्स और कई अरेस्टिंग डिवाइस लगे हुए हैं, जो इसे एक पूर्ण विकसित नौसैनिक हवाई अड्डा बनाते हैं।
तेजी से पूरा हुआ सफर: चीन की इंजीनियरिंग का चमत्कार
इस विशालकाय पोत का निर्माण 2019 में शंघाई के जियांगनान शिपयार्ड में शुरू हुआ था। 17 जून 2022 को इसे लॉन्च किया गया। 2024 से इसके समुद्री परीक्षण (सी-ट्रायल्स) शुरू हुए और अब तक इसे आठ बार समुद्र में उतारा जा चुका है। कुल 117 दिनों की परीक्षण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि चीन ने मात्र 6 वर्षों में इसे निर्माण से लेकर परीक्षण तक पूरा कर लिया, जबकि अमेरिका के फोर्ड-क्लास कैरियर को निर्माण से कमीशनिंग तक 16 साल लगे।
फुजियान से उड़ान भरेंगे ये विमान: भविष्य के लड़ाके
3 सितंबर की भव्य सैन्य परेड में, चीन ने चार ऐसे विमानों का प्रदर्शन किया जिन्हें फुजियान से संचालित करने की योजना है। इनमें शामिल हैं: J-35A (स्टेल्थ फाइटर), J-15T (हेवी कैरियर-बोर्न फाइटर), J-15DT (इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर), और KJ-600 (एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट)। ये विमान फुजियान को एक चलते-फिरते, अत्याधुनिक फ्लोटिंग एयरबेस में बदल देंगे।
चीन का मीडिया और सोशल मीडिया दो संभावित तारीखों की चर्चा कर रहे हैं: 18 सितंबर 2025, जापान पर चीन के आक्रमण की 94वीं बरसी, और 1 अक्टूबर, चीन का राष्ट्रीय दिवस। ये अटकलें स्पष्ट करती हैं कि जहाज अब केवल परीक्षण चरण में नहीं है, बल्कि कमीशनिंग के करीब है।
भारत और हिंद महासागर पर प्रभाव: एक नई सामरिक चुनौती
फुजियान की सबसे बड़ी सामरिक अहमियत यह है कि यह चीन की पहुँच को हिंद महासागर तक विस्तारित करेगा। इसका तात्पर्य यह है कि चीन के जहाज अब अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर दक्षिण पूर्व एशिया तक आसानी से गश्त कर सकेंगे। भारत के लिए यह एक सीधी चुनौती है, क्योंकि हिंद महासागर को पारंपरिक रूप से भारत की “पिछवाड़े” (बैकयार्ड) रणनीति का क्षेत्र माना जाता है।
फुजियान सिर्फ एक और जहाज नहीं है, बल्कि यह चीन की बढ़ती नौसैनिक शक्ति की एक स्पष्ट घोषणा है। यह दुनिया को यह संदेश देता है कि अब अमेरिका महासागरों का एकमात्र बादशाह नहीं रहेगा। और भारत के लिए, यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि हिंद महासागर में नौसैनिक प्रतिस्पर्धा अब और भी तीव्र होने वाली है।
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