जेडी वांस की उम्मीद, पत्नी के धर्म पर गरमाई बहस: क्या आस्था थोंपी जा सकती है?
हाल ही में, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने मिसिसिपी में ‘Turning Point USA’ के एक कार्यक्रम में अपनी पत्नी उषा वांस की आस्था को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जो चर्चा का विषय बन गईं। उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि उनकी पत्नी हिंदू परिवार से हैं, हालांकि वह स्वयं को ज्यादा धार्मिक नहीं मानतीं। यह स्वीकारोक्ति यहीं नहीं रुकी, बल्कि जब वांस ने कहा, “उम्मीद है एक दिन वो ईसाई धर्म अपनाएंगी,” तो सोशल मीडिया पर मानो भूचाल आ गया। यह बयान एक निजी आशा थी या धर्मांतरण की ओर इशारा, इस पर जमकर बहस छिड़ गई।
बच्चों के भविष्य पर ईसाईयत का रंग: एक समझौता
जेडी वांस ने इस कार्यक्रम में अपने परिवार की धार्मिक नीतियों को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि उनके दो बड़े बच्चे ईसाई स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, और उनके आठ साल के बेटे ने पिछले साल अपनी पहली कम्यूनियन भी ली। वांस ने कहा, “हमने तय किया कि बच्चे ईसाई माहौल में बड़े हों, लेकिन उनका चुनाव वही करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म उनके रिश्ते में कभी भी कोई बाधा नहीं बना। “ज्यादातर रविवार को उषा मेरे साथ चर्च आती हैं। और हाँ, मैं चाहता हूँ कि एक दिन उन्हें भी वही एहसास हो जो मुझे चर्च में हुआ था। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता, तो भी कोई परेशानी नहीं। क्योंकि ईश्वर ने सबको अपनी राह चुनने की आजादी दी है।”
आस्था का सफर: जबरदस्ती नहीं, चुनाव
वांस ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ किसी को परिवर्तित करना नहीं, बल्कि उसे समझना और उसका सम्मान करना है। “अगर मेरी पत्नी ईसाई धर्म नहीं अपनाना चाहतीं, तो यह उनका अधिकार है। धर्म जबरदस्ती नहीं, इच्छा से अपनाया जाता है। यही ईसाई सिद्धांतों की खूबसूरती है।” उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी जोड़ा कि उषा अक्सर उनके बपतिस्मा कराने वाले पादरियों से बातचीत करती हैं, और कभी-कभी उन्हें लगता है कि वह उनसे ज्यादा करीब हैं।
उषा वांस: पहली भारतीय-अमेरिकी सेकंड लेडी
उषा वांस, जिनका मूल नाम उषा चिलुकुरी है, अमेरिका की पहली भारतीय-अमेरिकी सेकंड लेडी हैं। येल यूनिवर्सिटी से पढ़ी हुई वकील, उषा अपने हिंदू जड़ों पर गर्व करती हैं और उनका ईसाई धर्म में परिवर्तित होने का कोई इरादा नहीं रहा है।
“मैं हिंदू हूं और रहूंगी” – उषा का अडिग रुख
कुछ महीने पहले एक इंटरव्यू में, उषा ने अपने धर्म को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि जब जेडी वांस ने 2019 में कैथोलिक धर्म अपनाया, तब उन्होंने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की थी। “जब JD ने धर्म बदला, तब हमारे बीच बहुत बातचीत हुई। यह हमारे पहले बच्चे के जन्म के बाद की बात है। कैथोलिक धर्म अपनाने के साथ कई जिम्मेदारियां आती हैं जैसे बच्चों को उसी धर्म में पालना।” उषा ने यह भी बताया कि उन्होंने और जेडी ने बच्चों के लिए एक मध्य मार्ग निकाला है – वे ईसाई स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन उन्हें अपने धर्म का चुनाव करने की पूरी स्वतंत्रता है।
दोनों धर्मों का संगम: एक अनूठा पारिवारिक ताना-बाना
उषा ने इस बात पर जोर दिया कि उनका परिवार दोनों धर्मों की परंपराओं का सम्मान करता है। “मेरी दादी बहुत धार्मिक हिंदू हैं। वो रोज पूजा करती हैं, मंदिर जाती हैं। हम उनके साथ बहुत समय बिताते हैं। अगले साल मैं अपने घर में होली मनाने की सोच रही हूं।” उनके अनुसार, उनके बच्चे भले ही ईसाई स्कूलों में हों, लेकिन वे हिंदू परंपराओं और पारिवारिक संस्कारों से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।
नाराजगी और सोशल मीडिया का मंच: हिंदू समुदाय की प्रतिक्रिया
जेडी वांस के “उम्मीद है एक दिन वो ईसाई धर्म अपनाएंगी” वाले बयान ने भारतीय-अमेरिकी हिंदू समुदाय को काफी हद तक नाराज कर दिया। कई लोगों ने इसे “धार्मिक रूप से असंवेदनशील” बताया और “धर्मांतरण की इच्छा” के रूप में देखा। हालांकि, कुछ लोगों ने वांस के इस तर्क का भी समर्थन किया कि उन्होंने स्पष्ट किया था कि “आस्था जबरदस्ती नहीं होती,” जिसका अर्थ है कि वह किसी पर धर्म थोपने की वकालत नहीं कर रहे थे। यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत बयान से कहीं ज्यादा, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक भिन्नताओं के प्रति संवेदनशीलता जैसे मुद्दों पर एक व्यापक चर्चा को जन्म देता है।
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