IMF की पाकिस्तान को चेतावनी: भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएं, वरना आर्थिक विकास का मार्ग अवरुद्ध!
नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान की सरकारी संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त की है। IMF की बहुप्रतीक्षित शासन और भ्रष्टाचार निदान आकलन (GCAD) रिपोर्ट ने पाकिस्तान में व्यवस्थागत कमजोरियों को उजागर किया है, जो देश को भ्रष्टाचार की दलदल में फंसाए हुए हैं। रिपोर्ट में तत्काल संरचनात्मक सुधारों की मांग की गई है, अन्यथा अगले महीने IMF द्वारा 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण वितरण पर संशय बना रहेगा।
आर्थिक विकास के लिए सुशासन अनिवार्य:
‘डॉन’ के अनुसार, GCAD रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि पाकिस्तान अगले तीन से छह महीनों के भीतर सुशासन सुधारों के एक व्यापक पैकेज को लागू करता है, तो अगले पांच वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि दर 5% से बढ़कर 6.5% तक पहुंच सकती है। यह स्पष्ट संकेत है कि IMF पाकिस्तान के आर्थिक भविष्य को सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था से जोड़ रहा है।
तरजीही व्यवहार और अपारदर्शिता पर सवाल:
रिपोर्ट में विशेष रूप से सरकारी ठेकों में प्रभावशाली सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को मिलने वाले तरजीही व्यवहार को समाप्त करने और विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के कामकाज में पारदर्शिता लाने की मांग की गई है। IMF का मानना है कि एकीकृत विषय नीति निर्माण, कार्यान्वयन और निगरानी में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना महत्वपूर्ण है। इसमें सूचना तक पहुंच में सुधार और राज्य व गैर-राज्य अभिनेताओं की क्षमता को मजबूत करना शामिल है, ताकि वे शासन और आर्थिक निर्णय लेने में प्रभावी ढंग से भाग ले सकें।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई में प्रशासनिक सुधारों की भूमिका:
IMF और पाकिस्तान सरकार दोनों इस बात पर सहमत हैं कि स्थायी सुधारों के लिए भ्रष्टाचार की कमजोरियों का सामना करना और उन्हें कम करना अत्यंत आवश्यक है। रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार विरोधी प्रयास तब सबसे प्रभावी होते हैं जब प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण उपायों को सीधे भ्रष्टाचार से निपटने वाली पहलों के साथ जोड़ा जाता है। संकेतक समय के साथ भ्रष्टाचार पर कमजोर नियंत्रण दर्शाते हैं, जिससे सार्वजनिक व्यय की प्रभावशीलता, राजस्व संग्रह और कानूनी व्यवस्था में विश्वास प्रभावित होता है।
बजट, राजकोषीय रिपोर्टिंग और सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन में कमजोरियां:
GCAD रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, पाकिस्तान कई सरकारी कार्यों में प्रणालीगत शासन की कमजोरियों का सामना कर रहा है। देश बजट, राजकोषीय रिपोर्टिंग और सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन, विशेष रूप से पूंजीगत व्यय, खरीद और सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों की निगरानी में कमजोरियों से उत्पन्न भ्रष्टाचार के जोखिमों से ग्रस्त है।
जटिल कर प्रणाली भी एक बड़ी बाधा:
रिपोर्ट में अपर्याप्त क्षमता और निगरानी वाले अधिकारियों द्वारा संचालित अत्यधिक जटिल और अपारदर्शी कर प्रणाली पर भी प्रकाश डाला गया है, जो प्रदर्शन को और कमज़ोर कर रही है।
यह रिपोर्ट पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। IMF की यह कड़ी कार्रवाई देश को भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सुशासन स्थापित करने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे अंततः उसके आर्थिक भविष्य को संवारा जा सकेगा।
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