भारत अब सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अंतरिक्ष की गहराइयों में अपना साम्राज्य स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस महा-मिशन में अब रूस की ‘वाइल्ड कार्ड एंट्री’ ने पूरी दुनिया, खासकर चीन और अमेरिका के होश उड़ा दिए हैं। भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी में है—एक ऐसी उपलब्धि जो वर्तमान में दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही है। हालांकि हाल के दिनों में भारत के कुछ स्पेस मिशनों के सामने चुनौतियां आईं, लेकिन रूस के साथ ने इस पूरे प्रोजेक्ट में नई जान फूंक दी है।
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इसरो (ISRO) एक ऐसे ऐतिहासिक मिशन पर काम कर रहा है, जो वैश्विक मंच पर भारत की पहचान को हमेशा के लिए बदल देगा। लक्ष्य स्पष्ट है—साल 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ का निर्माण। इसे पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 450 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि मौजूदा ‘इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ (ISS) साल 2030-31 तक रिटायर होने वाला है। इसके बाद चीन का ‘तियांगोंग’ ही एकमात्र सक्रिय स्पेस स्टेशन बचेगा, और यहीं से भारत का असली गेम शुरू होगा।
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यदि भारत 2035 तक अपना स्टेशन तैयार कर लेता है, तो वह अंतरिक्ष की महाशक्तियों में शुमार होकर सीधे तौर पर चीन को टक्कर देगा। हाल ही में मॉस्को में आयोजित एक स्पेस फोरम में इसरो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत इस मिशन के लिए रूस के साथ साझेदारी को लेकर उत्साहित है। रूस के पास अंतरिक्ष स्टेशन संचालित करने का दशकों का अनुभव है। 1986 से 2001 तक ‘मीर’ (Mir) स्टेशन का सफल संचालन और ISS में उनकी अहम भूमिका इसका प्रमाण है। इस साझेदारी का मतलब है कि भारत को शून्य से शुरुआत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि वह सीधे ‘एडवांस लेवल’ पर काम करेगा।
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रूस न केवल अत्याधुनिक तकनीक साझा करेगा, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस-वॉक, लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने और जटिल रिपेयरिंग मिशनों के लिए प्रशिक्षित भी करेगा। भारत और रूस का यह साथ नया नहीं है; 1975 में पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ हो, 1984 में राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा या फिर मौजूदा ‘गगनयान’ मिशन—रूस हमेशा भारत का भरोसेमंद साथी रहा है। हालांकि तकनीकी देरी और सिस्टम टेस्टिंग जैसी चुनौतियां सामने खड़ी हैं, लेकिन रूस के अनुभव से भारत इन बाधाओं को तेजी से पार कर सकता है। आज भारत एक साथ तीन बड़े मोर्चों—स्पेस, एनर्जी और जियोपॉलिटिक्स—पर अपनी धाक जमा रहा है, जो उसे भविष्य का सुपरपावर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।
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