अफगानिस्तान में भूकंप, लेकिन पाकिस्तान की चालबाजियां जारी: भारत की मानवता और पाकिस्तान की क्रूरता का अंतर साफ
अफगानिस्तान के उत्तरी शहर मज़ारे शरीफ में आए 6.3 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने जहां 20 से ज़्यादा लोगों की जान ली और 300 से ज़्यादा को घायल कर दिया, वहीं इस त्रासदी ने भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर मानवता और क्रूरता का अंतर स्पष्ट कर दिया है। जहाँ भारत ने तत्काल मदद का हाथ बढ़ाया, वहीं पाकिस्तान ने सैकड़ों अफगान शरणार्थियों को अपने देश से बाहर धकेल दिया।
भारत की मानवीयता, पाकिस्तान की घृणा
भूकंप के तुरंत बाद, भारत अफगानिस्तान पहुंचने वाला पहला देश बना जिसने सहायता सामग्री भेजी। वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तान ने 40 से ज़्यादा अफगान शरणार्थियों को अपने देश से निकाल दिया। यह घटनाक्रम तब हुआ जब अफगानिस्तान में लोग अपनों को खोने के दुख से उबरने की कोशिश कर रहे थे।
अफगानिस्तान के लोगों ने इस घटना को भारत और पाकिस्तान के बीच के फर्क के रूप में देखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत उनका दोस्त है और पाकिस्तान दुश्मन। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी को फोन कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
पाकिस्तान का दोहरा मापदंड: मजाक और दुर्व्यवहार
अफगानिस्तान में जहां भारत मानवता का परिचय दे रहा था, वहीं पाकिस्तान में भूकंप से मारे गए अफगानों का मजाक उड़ाया जा रहा था। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर यह कहा जा रहा था कि अफगान गद्दार हैं और उन्हें ऐसे ही मरना चाहिए। इस घृणित बयानबाजी के जवाब में, अफगानिस्तान के लोगों ने यह ऐलान कर दिया कि वे अब भारत के साथ ही रहेंगे।
अफगान नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भारत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को धन्यवाद देते हुए लिखा, “डॉक्टर साहब, आपकी बातों और रुख ने एक बार फिर अफगानिस्तानीयों का दिल जीत लिया है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “हमारी मदद करने के लिए थैंक यू इंडिया।” एक अफगान ने तो यहां तक लिखा, “भारत बचाता है तो पाकिस्तान मारता है।”
दो तरफा दबाव: पाकिस्तान की बढ़ती मुश्किलें
इसी बीच, पाकिस्तान खुद को एक नए संकट में पा रहा है। अफगानिस्तान के साथ-साथ भारत ने भी अपनी सीमाओं पर सैन्य गतिविधि तेज कर दी है। भारत ने राजस्थान और गुजरात सहित कई हिस्सों में “त्रिशूल” नामक एक बड़े पैमाने पर त्रि-सेवा युद्धाभ्यास शुरू किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अफगानिस्तान में भूकंप के बाद की स्थिति बनी हुई है, जिससे पाकिस्तान पर चारों ओर से दबाव बढ़ गया है।
यह स्पष्ट है कि अफगानिस्तान के लोगों ने भारत की मानवता को सराहा है, जबकि पाकिस्तान की क्रूरता ने उनके दिलों में नफरत पैदा कर दी है। पाकिस्तान के दो तरफा दबाव और अफगानिस्तान के लोगों के बदलते रुख से यह कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है।
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