“अमेरिका पीड़ित नहीं, हमलावर है!” संयुक्त राष्ट्र में ईरान का तीखा पलटवार, इजरायल-यूएस गठबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अमेरिका को कड़े शब्दों में घेरते हुए स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन पीड़ित होने का ढोंग कर रहा है, जबकि असल में वह ‘आक्रामक’ है। इरावानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर बिना किसी उकसावे के दो आक्रामक युद्ध छेड़कर संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन किया है। ईरानी समाचार एजेंसी IRIB के अनुसार, सुरक्षा परिषद और महासचिव को लिखे पत्र में इरावानी ने हाउथी विद्रोहियों (अंसार अल्लाह) को ईरान के इशारे पर काम करने वाला बताने वाले अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सना के अधिकारी स्वतंत्र हैं, यमनी जनता के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और अपने निर्णय देश के हितों को ध्यान में रखकर लेते हैं। उन्होंने इन आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
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वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (राजदूत जेनोन मुकोंगो न्गे) के पास है, जबकि एंटोनियो गुटेरेस महासचिव की भूमिका में हैं। इस बीच, ईरानी राजदूत ने वाशिंगटन के 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रति प्रतिबद्धता के दावे को भी बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद समझौते के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता का कोई सबूत नहीं है। इरावानी ने आगे आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद से ही अमेरिका ने लगातार अपने वादों से मुंह मोड़ा है और जानबूझकर इसके क्रियान्वयन में बाधाएं खड़ी की हैं।
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ईरान ने अमेरिकी सरकार द्वारा इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के “42 स्पष्ट और बुनियादी उल्लंघनों” का पूरा दस्तावेजीकरण किया है। तेहरान के रुख को स्पष्ट करते हुए इरावानी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करते हुए अमेरिका और इजरायल ने क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता को चुनौती दी है। उन्होंने दोहराया, “अमेरिका हमलावर है, पीड़ित नहीं।” इसी बीच, आईआरजीसी (IRGC) ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ने उकसावे की कार्रवाई जारी रखी, तो बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के साथ-साथ अमेरिका के सहयोगियों के तेल और गैस निर्यात मार्गों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरान का संदेश साफ है: “क्षेत्र का तेल और गैस निर्यात या तो सबके लिए होगा, या फिर किसी के लिए नहीं।”
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