तनाव में क्यों बढ़ जाती है भूख? जानें क्या है ‘स्ट्रेस ईटिंग’ और इससे बचने के कारगर उपाय
क्या ऑफिस की किसी तनावपूर्ण मीटिंग या एग्जाम के प्रेशर के बीच आपको अचानक जोरों की भूख महसूस होने लगती है? अक्सर तनाव के दौरान कुछ न कुछ खाते रहने की यह इच्छा ‘स्ट्रेस ईटिंग’ या ‘इमोशनल ईटिंग’ का संकेत हो सकती है। आज के दौर में बढ़ता मोटापा केवल खराब डाइट का नतीजा नहीं, बल्कि मानसिक तनाव का भी परिणाम है।
दरअसल, ऑफिस के टारगेट का दबाव, अच्छे ग्रेड्स की चिंता, मनचाही नौकरी या सैलरी न मिलना और लाइफ को एन्जॉय न कर पाना जैसे कारण युवाओं में तनाव बढ़ा रहे हैं। इस मानसिक बोझ को कम करने के लिए लोग अक्सर अनजाने में खाने का सहारा लेते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह समस्या क्या है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।
क्या होती है स्ट्रेस ईटिंग?
हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, तनाव के समय हमारे शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। जब ‘कॉर्टिसोल’ (Cortisol) हार्मोन का स्तर बढ़ता है, तो हाई-कैलोरी फूड खाने की तीव्र इच्छा जागती है। यह शरीर की एक जैविक प्रतिक्रिया है, जो लंबे समय तक बनी रहे तो ‘क्रॉनिक स्ट्रेस’ में बदल जाती है और आपकी ईटिंग हैबिट्स को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।
कैसे पहचानें स्ट्रेस ईटिंग के लक्षण?
- अचानक भूख का अहसास: एक शोध के मुताबिक, अगर आपने अभी भोजन किया है और चिंता महसूस होते ही फिर से कुछ खाने का मन करे, तो यह स्ट्रेस ईटिंग है। भावनात्मक तनाव मस्तिष्क के ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ को सक्रिय कर देता है, जिससे व्यक्ति भोजन में सुकून तलाशने लगता है।
- अनहेल्दी और मीठे की चाहत: स्ट्रेस ईटिंग के दौरान व्यक्ति का मन सलाद या पौष्टिक खाने के बजाय अत्यधिक मीठा, वसायुक्त या जंक फूड खाने का करता है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, तनाव में शरीर अक्सर ‘कम्फर्ट फूड’ की मांग करता है।
स्ट्रेस ईटिंग से बचाव के तरीके:
- सजग होकर खाएं: भोजन करने से पहले रुककर विचार करें कि क्या आपको वाकई भूख लगी है या आप तनाव के कारण खा रहे हैं। बस कुछ मिनट का आत्म-चिंतन आपको जरूरत से ज्यादा खाने से बचा सकता है।
- हेल्दी विकल्प चुनें: अगर कुछ खाने की तीव्र इच्छा हो ही रही है, तो चिप्स, कुकीज या मिठाई की जगह फल, मेवे, दही या भुने चने जैसे पौष्टिक विकल्पों को अपनी डाइट में शामिल करें।
- अपने ‘ट्रिगर्स’ को पहचानें: ध्यान दें कि किस परिस्थिति या बात के बाद आप खाने की ओर भागते हैं। अपने इमोशनल ट्रिगर्स को समझें और उनसे दूरी बनाएं। समस्या गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- योग और व्यायाम का सहारा: योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज मस्तिष्क में ब्लड फ्लो बढ़ाते हैं। इससे न केवल तनाव कम होता है, बल्कि आपका ध्यान सकारात्मक चीजों की ओर केंद्रित होता है और बेवजह की भूख पर लगाम लगती है।
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