इजरायल का चीन पर पहला वार: भारत की हैरानी

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इजरायल का चीन पर पहला वार: भारत की हैरानी
Israel का पहली बार चीन पर हमला, भारत भी हैरान

विश्व मंच पर चीन का नया दांव: नेतन्याहू के इज़राइल को घेरने का प्रयास

जहां एक ओर चीन भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपने सूचना युद्ध के हथकंडों में लगातार नाकाम हो रहा है, वहीं अब उसने अपनी पैनी नज़र इज़राइल पर गड़ा दी है। प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध चल रहे नैरेटिव वॉर के असफल होने के बाद, चीन अब प्रधानमंत्री मोदी के एक खास दोस्त, बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने की साजिश रच रहा है।

यह वही पैंतरा है जिसे चीन ने भारत के पड़ोसी देशों को उकसाकर भारत को अस्थिर करने के लिए आजमाया है। अब उसी षड्यंत्र के तहत, चीन इज़राइल के पड़ोसियों में अपनी पैठ बना रहा है। इस खेल में कतर और ईरान जैसे देश भी चीन का साथ दे रहे हैं। मगर, जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने दुष्प्रचार के तंत्र को ध्वस्त किया, उसी तरह नेतन्याहू भी अब खुलेआम चीन को चुनौती दे रहे हैं।

नेतन्याहू की चीन को सीधी चेतावनी

शायद यह पहली बार है जब नेतन्याहू ने सीधे तौर पर चीन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “मैं मुक्त बाज़ार का समर्थक हूँ, लेकिन हम खुद को ऐसी स्थिति में पा सकते हैं जहाँ हमारे हथियार उद्योग अवरुद्ध हो जाएँ। हमें यहाँ हथियार उद्योग विकसित करने होंगे – न केवल अनुसंधान और विकास, बल्कि अपनी ज़रूरत की चीज़ें बनाने की क्षमता भी।” इज़राइली प्रधानमंत्री ने यूरोप में मुस्लिम प्रवासियों के बढ़ते पलायन को भी कटघरे में खड़ा किया, जिसके चलते सरकारों को इज़राइल विरोधी रुख अपनाने और रक्षा सौदों को रद्द करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इज़राइल पर “पश्चिमी मीडिया” का हमला?

यरुशलम स्थित विदेश मंत्रालय में 250 अमेरिकी राज्य विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए, नेतन्याहू ने अपने दावों को और पुख्ता किया। उन्होंने चीन और कतर पर “पश्चिमी मीडिया में इज़राइल को घेरने के लिए उसके सहयोगियों का समर्थन कम करके अभियान चलाने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “एक चीन है। और दूसरा कतर है। वे पश्चिमी दुनिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के सोशल मीडिया के ज़रिए इज़राइल पर हमले की योजना बना रहे हैं। हमें इसका मुकाबला करना होगा, और हम अपने तरीकों से इसका मुकाबला करेंगे।”

चीन इज़राइल के पीछे क्यों?

प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार अभियानों को हम सभी ने देखा है। किसान आंदोलन को हवा देना, सीएए के खिलाफ एजेंडा चलाना, मणिपुर पर झूठ फैलाना और अब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शुरू किया गया सूचना युद्ध, ये सभी उसी नाकाम रणनीति का हिस्सा रहे हैं। भारत और प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध इस दुष्प्रचार अभियान के लिए मीडिया और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया गया। लेकिन हर बार प्रधानमंत्री मोदी विजयी रहे। अब बारी नेतन्याहू की है।

हाल के दिनों में, मीडिया और सोशल मीडिया पर इज़राइल के खिलाफ नफरत बढ़ती हुई नज़र आ रही है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में इज़राइल के खिलाफ नारेबाज़ी हो रही है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, गूगल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इज़राइल के खिलाफ नकारात्मक खबरें वायरल करवाई जा रही हैं। यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसके पीछे चीन का हाथ होने की आशंका है।


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