रूसी तेल पर जयशंकर का दो-टूक जवाब: ‘राजनीतिक दबाव नहीं, अपना फायदा देखेगा भारत’
रूसी तेल आयात को कम करने के वाशिंगटन के दावों के बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा खरीद के फैसले ‘राजनीतिक दबाव’ के बजाय विशुद्ध रूप से ‘लागत, जोखिम और उपलब्धता’ के गणित पर आधारित होंगे। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ एक संवादात्मक सत्र में जयशंकर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार बेहद पेचीदा है, और भारतीय तेल कंपनियां अपने हितों को ध्यान में रखकर ही कोई कदम उठाएंगी।
इसे भी पढ़ें: Donald Trump की Zelenskyy को कड़ी चेतावनी, Russia से Deal करो, वरना बड़ा मौका गंवा दोगे
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता केवल एक नीति नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और विकास का अभिन्न हिस्सा है—एक ऐसा गहरा संबंध जो किसी भी राजनीतिक परिदृश्य से परे है। रूसी तेल खरीद को बंद करने और इससे रणनीतिक स्वायत्तता पर पड़ने वाले असर के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां भी ठीक वैसे ही फैसले लेती हैं जैसे यूरोप या दुनिया के अन्य हिस्सों की कंपनियां बाजार की उपलब्धता और जोखिम को देखकर लेती हैं। उल्लेखनीय है कि भारत ने वाशिंगटन के उस दावे की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन, जिसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता की बात कही गई थी।
इसे भी पढ़ें: दुनिया में ‘Power Politics’ का नया दौर! Friedrich Merz बोले- Europe को बलिदान के लिए तैयार रहना होगा
इस कूटनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा आर्थिक बदलाव भी देखने को मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया फोन वार्ता के बाद, भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क में भारी कटौती की गई है। यह टैरिफ अब 50 प्रतिशत से घटकर महज 18 प्रतिशत रह गया है। इस राहत में वह 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी हटा लिया गया है जो ट्रम्प ने पिछले साल अगस्त में रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाया था। जयशंकर का यह बयान साफ करता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक संबंधों के बीच संतुलन बनाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
