भारत-न्यूजीलैंड के बीच ‘ऐतिहासिक’ व्यापारिक डील: 9 महीनों में पूरा हुआ FTA का सफर, जानें भारत के लिए क्या है खास?
साल 2025 की विदाई से पहले भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन के बीच टेलीफोन पर हुई एक विशेष वार्ता ने दोनों देशों के बीच ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) पर ऐतिहासिक मुहर लगा दी है। यह समझौता न केवल व्यापार और निवेश की नई इबारत लिखेगा, बल्कि नवाचार और साझा अवसरों के जरिए दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई रफ्तार देगा। व्यापार के साथ-साथ दोनों नेताओं ने रक्षा, खेल, शिक्षा और ‘पीपल टू पीपल’ संबंधों में हो रही प्रगति की भी सराहना की।
महज 9 महीनों में ‘डील डन’: रिश्तों की नई मिसाल
इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी इसकी रफ्तार रही। मार्च 2025 में प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान शुरू हुई यह बातचीत सिर्फ 9 महीनों में अपने मुकाम तक पहुंच गई। यह न केवल दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंधों को दर्शाता है, बल्कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी प्रमाण है। यह FTA बाजार तक पहुंच बढ़ाएगा और निवेश के प्रवाह को नई दिशा देगा। इससे भारत के उद्यमियों, किसानों, MSMEs, छात्रों और युवाओं के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में संभावनाओं के नए आसमान खुलेंगे।
व्यापारिक आंकड़ों में बड़ी छलांग
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। वित्त वर्ष 2020 में दोनों देशों के बीच 1.67 अरब डॉलर का व्यापार था, जो कोरोना काल में कुछ धीमा हुआ। लेकिन 2023 के बाद इसने जो रफ्तार पकड़ी, उसने सबको चौंका दिया। साल 2024 में यह आंकड़ा पहली बार 2 अरब डॉलर के पार गया और जून 2025 तक वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल व्यापार करीब 1.5 गुना बढ़कर 3.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वर्तमान में भारत, न्यूजीलैंड के लिए 12वां सबसे बड़ा निर्यात बाजार बनकर उभरा है।
भारत के लिए क्या हैं इस डील के मायने?
इस समझौते के तहत भारत ने अपने हितों और घरेलू बाजार का बखूबी ध्यान रखा है।
- रियायतें: न्यूजीलैंड को कीवी फल, वाइन, समुद्री खाद्य पदार्थ, चेरी, एवोकाडो और मनुका शहद जैसे उत्पादों पर शुल्क छूट मिलेगी।
- सुरक्षा चक्र: भारत ने अपने संवेदनशील डेयरी क्षेत्र (दूध, क्रीम, दही, पनीर आदि) को इस समझौते से बाहर रखा है ताकि घरेलू किसानों के हितों पर आंच न आए। इसके अलावा प्याज, दलहन, चीनी, रत्न-आभूषण, तांबा और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों को भी शुल्क छूट के दायरे से बाहर रखा गया है।
- तकनीकी लाभ: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, न्यूजीलैंड भारतीय किसानों को कीवी, सेब और शहद की उत्पादकता बढ़ाने के लिए ‘एग्री-टेक कार्ययोजना’ के तहत मदद करेगा। इसमें आधुनिक रोपण सामग्री, कोल्ड चेन मैनेजमेंट और खाद्य सुरक्षा के लिए तकनीकी सहायता शामिल होगी।
‘फाइव आइज’ देशों के साथ मजबूत होती पकड़
सामरिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी यह भारत की बड़ी जीत है। दुनिया के ताकतवर ‘फाइव आइज’ (Five Eyes) गठबंधन के तीन सदस्यों—ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अब न्यूजीलैंड—के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता फाइनल हो चुका है। अमेरिका के साथ बातचीत अंतिम चरण में है और कनाडा के साथ भी संवाद फिर से शुरू होने की प्रक्रिया में है। यह दिखाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की साख और स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
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