मिडिल ईस्ट में शांति बहाली की बिसात बिछ चुकी है और इस बार भारत को एक निर्णायक खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद खास और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय शांति पहल का हिस्सा बनने का न्योता दिया है। इस पहल का एकमात्र लक्ष्य मिडिल ईस्ट में सुलगते गजा संघर्ष को विराम देना और वहां स्थायी शांति स्थापित करना है। अमेरिका पहले ही इस मुद्दे पर अपनी 20-सूत्रीय योजना पेश कर चुका है, जिसे न केवल कई देशों का समर्थन मिला है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भी मुहर लग चुकी है। अब इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए ‘गजा बोर्ड ऑफ पीस’ नामक एक अंतरराष्ट्रीय संस्था का गठन किया जा रहा है, जिसमें भारत एक अहम स्तंभ के रूप में नजर आएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस मिशन में भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने की इच्छा जताई है और भारत को सदस्य देश के रूप में शामिल करने की योजना बनाई है।
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अमेरिकी राजदूत सरियो गौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें पीएम मोदी तक राष्ट्रपति ट्रंप का यह ऐतिहासिक निमंत्रण पहुंचाने का गौरव प्राप्त हुआ है। उनके अनुसार, यह बोर्ड गजा में न केवल स्थिरता लाएगा, बल्कि वहां प्रभावी शासन और समृद्धि के द्वार भी खोलेगा। राजदूत ने ट्रंप की वह चिट्ठी भी सार्वजनिक की है। गौरतलब है कि 15 जनवरी को ट्रंप ने ‘गजा बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन का ऐलान किया था, जिसे इजराइल-हमास युद्ध समाप्त करने की अमेरिकी रणनीति का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। रविवार, 18 जनवरी तक भारत के अलावा जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस और पाकिस्तान जैसे देशों ने भी इस बोर्ड में शामिल होने के निमंत्रण की पुष्टि की है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड की अस्थाई सदस्यता के लिए एक अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान निर्धारित है, जिसका उपयोग गजा के पुनर्निर्माण में होगा। हालांकि, 3 साल के कार्यकाल के लिए ऐसी कोई आर्थिक शर्त नहीं रखी गई है।
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इस अंतरराष्ट्रीय पैनल में दुनिया के कई दिग्गज चेहरे शामिल हो सकते हैं, जिनकी अंतिम सूची स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के दौरान जारी होने की संभावना है। निमंत्रण पाने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप अर्दआन का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। पाकिस्तान ने भी पुष्टि की है कि पीएम शहबाज शरीफ को इस शांति मिशन का हिस्सा बनने का बुलावा मिला है। हालांकि, इस वैश्विक पहल पर इजरायल के सुर थोड़े तीखे नजर आ रहे हैं। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने गजा बोर्ड पर आपत्ति जताते हुए अपनी सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार की बैठक बुलाई है। नेतन्याहू कार्यालय का स्पष्ट कहना है कि बोर्ड की रूपरेखा इजराइल से बिना किसी विचार-विमर्श के तय की गई है, जो उनकी मौजूदा नीतियों के विपरीत है।
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