क्षेत्र में बढ़ते तनाव और बारूद की गंध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई की एक शक्तिशाली हुंकार सुनाई दी है। उन्होंने इज़राइल के खिलाफ लेबनान के हथियारबंद गुट हिज़्बुल्लाह के अडिग साहस और संघर्ष की मुक्तकंठ से सराहना की है। खामेनेई ने हिज़्बुल्लाह के हौसले को दुनिया भर के दबे-कुचले और मजलूम लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण और आज़ादी का जीवंत प्रतीक करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा किए गए एक भावुक संदेश में, खामेनेई ने हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख़ नईम कासिम और उनके जांबाज लड़ाकों द्वारा भेजी गई वफ़ादारी की चिट्ठी का जवाब दिया। उन्होंने इज़राइल और उसके सहयोगियों की सैन्य आक्रामकता के सामने “अडिग चट्टान” की तरह सीना तानकर खड़े रहने के लिए हिज़्बुल्लाह के जज्बे को सलाम किया।
खामेनेई का कड़ा संदेश: जिहाद और प्रतिरोध ही अंतिम विकल्प
अयातुल्ला खामेनेई ने अपने बयान में दोटूक कहा, “आज, जब दुनिया के तमाम देश अमेरिकी सरकार और अपराधी ज़ायोनियों (जो जिंदगियों और पीढ़ियों को तबाह करने पर तुले हैं) के ज़ुल्म से त्रस्त हो चुके हैं, तो जिहाद और प्रतिरोध के अलावा आगे बढ़ने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।”
ईरानी नेता ने हिज़्बुल्लाह के अभियान को ‘ग्लोबल एरोगेंस’ (वैश्विक अहंकार) और उसके प्यादों के अत्याचार के विरुद्ध एक “प्रेरणादायक संदेश” बताया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष दुनिया के आज़ाद देशों को अपनी संप्रभुता के लिए लड़ने की शक्ति देता है।
खामेनेई ने हिज़्बुल्लाह के कमांडरों और लड़ाकों के अटूट संकल्प की भी प्रशंसा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह प्रतिबद्धता विशुद्ध इस्लामी सिद्धांतों और इमाम खुमैनी के साथ-साथ दिवंगत पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की महान विरासत पर टिकी है। उन्होंने दोहराया, “इस्लामी क्रांति के शहीद नेता द्वारा तय की गई नीति के अनुसार, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इन वीर लड़ाकों की रक्षा को अपनी रणनीतिक और नैतिक ज़िम्मेदारी मानता है।”
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लेबनान की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं
खामेनेई ने वैश्विक मंच पर अपनी बात रखते हुए कहा कि हिज़्बुल्लाह और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा ईरान के लिए सर्वोपरि है। उन्होंने अमेरिका से जुड़े इस “थोपे गए युद्ध” को खत्म करने की शर्त रखते हुए कहा कि किसी भी शांति समझौते में लेबनान के खिलाफ इज़राइली सैन्य कार्रवाई का पूर्ण अंत शामिल होना अनिवार्य है।
ईरानी नेता ने दक्षिणी लेबनान की जनता के धैर्य और समर्थन को भी सलाम किया। शहीद नेता सैयद हसन नसरल्लाह और अन्य जांबाज कमांडरों को श्रद्धांजलि देते हुए खामेनेई ने एक बेहद प्रभावशाली उपमा दी। उन्होंने कहा कि इन लड़ाकों के खून और पसीने ने हिज़्बुल्लाह को एक “नन्हे पौधे” से सींचकर एक “विशाल वटवृक्ष” में तब्दील कर दिया है। इसी समर्पण के चलते आज पूरे इस्लामी जगत में लेबनान का सम्मान और मान-सम्मान नई ऊंचाइयों पर है।
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अयातुल्ला खामेनेई का यह बयान क्षेत्र में गहराते संकट के बीच न केवल हिज़्बुल्लाह का हौसला बढ़ाता है, बल्कि तेहरान के अटूट राजनीतिक और वैचारिक समर्थन की भी पुष्टि करता है।
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Today, as the nations of the world have grown weary of the tyranny and oppression of the US government and the criminal Zionists, who are the destroyers of lives and generations, there remains no path forward except jihad and resistance.
— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) July 26, 2026
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