दुनिया का अनोखा खेल: फिलिस्तीन के समर्थन में गूंजी आवाज, फिर अचानक खामोश!
जो दुनिया फिलिस्तीनियों को हमेशा मुश्किलों में धकेलती रही, वही आज उनके लिए तिनके का सहारा बनने चली है। 21 सितंबर को ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल जैसे देशों ने फिलिस्तीन को एक देश के तौर पर मान्यता दे दी। इसके बाद सबकी निगाहें न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के 80वें सत्र पर थीं, जहाँ फिलिस्तीन के लिए आवाज़ उठाने वाले नेताओं के साथ एक ऐसा खेल हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया।
जब माइक बंद हुए, तो क्या हुआ?
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर फिलिस्तीन के समर्थन में बोलते हुए कई नेताओं के माइक अचानक बंद हो गए। यह कोई एक-दो घटना नहीं थी, बल्कि चार प्रमुख नेताओं के साथ ऐसा हुआ। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो भी इस अजीबोगरीब तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हुए। इन घटनाओं ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
इंडोनेशियाई राष्ट्रपति का माइक अचानक बंद
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो जब गाजा में शांति सैनिकों को भेजने की योजना बता रहे थे, तभी उनका माइक बंद हो गया। कुछ पल के लिए दुभाषिया भी अनुवाद नहीं कर सका। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के भाषण में भी ऐसी ही समस्या आई। उन्होंने इजरायल द्वारा गाजा में किए जा रहे नरसंहार की निंदा करते हुए फिलिस्तीन को तुरंत मान्यता देने की मांग की, लेकिन उनकी आवाज़ अचानक गायब हो गई। ट्रांसलेटर ने कहा कि राष्ट्रपति की आवाज़ नहीं आ रही, और जब तक ऑडियो वापस आया, सदन में भ्रम की स्थिति बनी रही।
कनाडा का बड़ा ऐलान, फिर माइक बंद
सबसे चौंकाने वाली घटना कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के संबोधन के दौरान हुई। जैसे ही कनाडा ने फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देने की घोषणा की और तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी, उनका माइक बंद हो गया। एक उपस्थित व्यक्ति ने मजाक में कहा कि मान्यता भले ही माइक बंद होने के बावजूद जोरदार और स्पष्ट सुनाई दी। बाद में, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों ने उपकरणों में तकनीकी खराबी को इस घटना का कारण बताया और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से इनकार किया।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति भी हुए परेशान
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ा। जैसे ही उन्होंने फिलिस्तीन का मुद्दा उठाया, उनका माइक बंद हो गया। रामाफोसा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान के दौरान इजरायल की कड़ी निंदा की और गाजा में इजरायल की कार्रवाई को नरसंहार बताया। उन्होंने दुनिया से फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने का आग्रह किया और 1967 की सीमाओं पर आधारित द्वि-राज्य समाधान को ही एकमात्र रास्ता बताया। उन्होंने तत्काल युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और फिलिस्तीनी राज्य के मार्ग में आने वाली बाधाओं, जैसे इजरायल की अलगाव दीवार, को हटाने की मांग की। उन्होंने फिलिस्तीनी पीड़ा और दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद के इतिहास के बीच समानताएं भी बताईं।
क्या मोसाद का हाथ है?
फिलिस्तीन के समर्थन में बोलने वाले नेताओं के माइक बंद होने की इन घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों बार-बार फिलिस्तीन के समर्थन में बोलते समय ही माइक बंद हुए? कई देशों के नेताओं का मानना है कि यह कोई संयोग नहीं हो सकता। चूंकि इजरायल फिलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते समर्थन को सहन नहीं कर सकता, इसलिए शक की सुई उसकी खुफिया एजेंसी मोसाद पर टिक गई है।
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