उत्तरी नाइजीरिया का नाइजर राज्य एक बार फिर भीषण हिंसा से दहल उठा है। शनिवार शाम भारी हथियारों से लैस बंदूकधारियों ने एक दूरदराज के गांव ‘कसुवान-दाजी’ पर धावा बोल दिया। इस बर्बर हमले में कम से कम 30 से 40 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि दर्जनों ग्रामीणों को अगवा कर लिया गया है।
तीन घंटे तक चला खूनी तांडव
स्थानीय निवासियों के अनुसार, हमलावरों ने शनिवार शाम गांव को घेर लिया और निवासियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमलावरों ने न केवल लोगों की जान ली, बल्कि स्थानीय बाजार और घरों को भी आग के हवाले कर दिया।
चश्मदीदों का बयान
ग्रामीणों ने बताया कि यह हमला लगभग तीन घंटे तक चला। दहशत का आलम यह है कि जीवित बचे लोग अपनों के शवों को उठाने के लिए गांव लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
मृतकों की संख्या
जहां पुलिस ने 30 मौतों की पुष्टि की है, वहीं स्थानीय लोगों और कैथोलिक चर्च के प्रवक्ता रेवरेंड फादर स्टीफन कबीरात का दावा है कि मरने वालों की संख्या 40 के पार हो चुकी है।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों ने हमले से एक हफ्ते पहले ही इलाके में संदिग्ध बंदूकधारियों की मौजूदगी की सूचना दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, पुलिस प्रवक्ता वासिउ अबियोदुन ने दावा किया कि सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं, लेकिन निवासियों ने रविवार तक किसी भी सुरक्षा बल के गांव पहुंचने से इनकार किया है।
अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना बने जंगल
पुलिस के अनुसार, हमलावर संभवतः पास के नेशनल पार्क के घने जंगलों से आए थे। नाइजीरिया के ये विशाल और सुनसान जंगल अब सशस्त्र गिरोहों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन गए हैं।
यह वही इलाका है जहां पिछले साल नवंबर में एक कैथोलिक स्कूल से 300 से अधिक बच्चों और शिक्षकों का अपहरण किया गया था। अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले देश नाइजीरिया में फिरौती के लिए अपहरण और सामूहिक हत्याएं अब एक गंभीर संकट बन चुकी हैं, विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सरकार और सुरक्षा बलों की पहुंच सीमित है।
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