काबुल में पाक प्लेन की दस्तक: तालिबान के गढ़ में हवाई वार, भारत को संदेश?
काबुल की फिजां में दो जोरदार धमाकों और फिर गोलियों की गूंज ने हर किसी को चौंका दिया। खबरों के मुताबिक, यह किसी और का नहीं, बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के विमानों का निशाना था, जिन्होंने अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर हवाई हमला किया। इस अप्रत्याशित कदम से दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास और बढ़ गई है। गनीमत ये रही कि यह हमला ऐसे वक्त हुआ जब तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भारत की पहली यात्रा पर थे। जानकारों की मानें तो, भारत का अफगानिस्तान में बढ़ता दबदबा पाकिस्तान को रास नहीं आ रहा और इसी बौखलाहट में यह कार्रवाई की गई।
हवाई हमले का माजरा क्या?
शहर के आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाज सुनने वाले चश्मदीदों की मानें तो, यह हमला खास तौर पर टीटीपी के सरगना नूर वली महसूद को निशाना बनाकर किया गया था। खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि महसूद पूर्वी काबुल में टीटीपी और अल-क़ायदा के एक गोपनीय ठिकाने से अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहा था। यह सब तब हो रहा है जब तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंध वैसे भी तल्ख चल रहे हैं। पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान पर टीटीपी को मदद पहुंचाने का आरोप लगाता रहा है।
पाक के निशाने पर थे टीटीपी के टॉप लीडर?
शहीद अब्दुल हक चौक के पास हुए इस हवाई हमले का मुख्य उद्देश्य नूर वली महसूद को खत्म करना था, जिसने 2018 में टीटीपी की कमान संभाली थी। सूत्रों की माने तो, हमले में ठिकाने को निशाना तो बनाया गया, लेकिन सीएनएन-न्यूज़18 को मिले नूर वली महसूद के एक ऑडियो संदेश से पता चलता है कि वह सुरक्षित हैं और पाकिस्तान में हैं। हालांकि, इस हमले में उनके बेटे की जान चली गई। इस बात से साफ है कि निशाना कोई आम आतंकवादी नहीं, बल्कि एक हाई-प्रोफाइल पाकिस्तानी आतंकवादी था। यह घटनाक्रम पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अफगानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप के महज़ 48 घंटे बाद हुआ, जो किसी जवाबी कार्रवाई या फिर पाकिस्तान के इशारे पर किसी तीसरे पक्ष की कार्रवाई का संकेत देता है।
पाकिस्तानी सेना के लिए सिरदर्द बने महसूद
9/11 के बाद अमेरिका के साथ पाकिस्तान के गठजोड़ को महसूद ने धोखा माना था और तब से वह इस्लामाबाद के लिए लगातार मुसीबत बने हुए हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाकर कई घातक हमले किए हैं, जिनमें सबसे ताजा हमला 8 अक्टूबर को हुआ था। बुधवार को अफगान सीमा के पास टीटीपी द्वारा किए गए एक हमले में दो वरिष्ठ अधिकारियों सहित 11 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे।
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