पीएम मोदी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा: एक ऐतिहासिक G20 शिखर सम्मेलन और भू-राजनीतिक दांव-पेंच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया दक्षिण अफ्रीका यात्रा कई मायनों में खास रही। यह सिर्फ़ एक राजनयिक दौरा नहीं था, बल्कि उभरती वैश्विक व्यवस्था, राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों और कुछ नेताओं द्वारा अपनाई जाने वाली आक्रामक विदेश नीति की भी पड़ताल थी।
दक्षिण अफ्रीका में G20 का ऐतिहासिक आयोजन
प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा से मिलने और जोहान्सबर्ग में आयोजित G20 बैठक में भाग लेने पहुंचे। यह बैठक दक्षिण अफ्रीका और राष्ट्रपति रामाफोसा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि पहली बार किसी अफ्रीकी महाद्वीप के देश में दुनिया की 20 सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाएं एक साथ आ रही थीं। यह सम्मेलन अफ्रीकी संघ के G20 में शामिल होने की दिशा में भी एक अहम कदम था, जो 2023 में भारत की अध्यक्षता के दौरान हुआ।
रामाफोसा: मोदी और पुतिन के खास दोस्त, ब्रिक्स का मजबूत स्तंभ
राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन का करीबी दोस्त बताया जाता है, ब्रिक्स (BRICS) समूह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह समूह उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है और पश्चिमी देशों को एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जाता है। उनकी यह पहचान उन्हें वैश्विक मंच पर एक खास स्थान दिलाती है।
यात्रा का महत्व और द्विपक्षीय कूटनीति
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ G20 शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं थी। जोहान्सबर्ग में उन्होंने कई अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। वे भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के त्रिपक्षीय मंच, छठे IBSA शिखर सम्मेलन में भी शामिल हुए। यात्रा से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी उत्साह व्यक्त करते हुए कहा था कि वे “वसुधैव कुटुम्बकम” और “एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य” के भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि यह शिखर सम्मेलन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
G20 सत्रों में भारत का एजेंडा
प्रधानमंत्री मोदी ने G20 शिखर सम्मेलन के तीनों सत्रों को संबोधित किया। पहले सत्र का शीर्षक “समावेशी और सतत आर्थिक विकास, किसी को पीछे न छोड़ना” था, जिसमें अर्थव्यवस्था निर्माण, व्यापार, विकास के लिए वित्तपोषण और ऋण भार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। अन्य दो सत्र “एक लचीला विश्व – G20 का योगदान” और “सभी के लिए एक निष्पक्ष और न्यायपूर्ण भविष्य” थे, जिनमें आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा परिवर्तन, खाद्य प्रणालियों, महत्वपूर्ण खनिजों, सभ्य कार्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों को शामिल किया गया।
ट्रंप की आक्रामकता और दक्षिण अफ्रीका पर दबाव
इस संदर्भ में, यह ध्यान देने योग्य है कि कुछ देशों की विदेश नीति, विशेष रूप से अमेरिका की, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रति अक्सर आक्रामक रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा को वाइट हाउस में बुलाई गई बैठक के दौरान यह आक्रामकता देखी गई थी। ट्रम्प ने ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद रामाफोसा को मिलने के लिए बुलाया और कथित तौर पर उनके साथ बदसलूकी और उन्हें डराने की कोशिश की। उन्होंने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए व्यंग्यात्मक ढंग से यह भी कहा कि पीएम मोदी उनके दोस्त हैं और उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था। यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ वैश्विक शक्तियां अन्य देशों के नेताओं को अपने प्रभाव में लाने या धमकाने का प्रयास करती हैं।
भारतीय प्रवासियों से मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा के दौरान दक्षिण अफ्रीका में भारतीय प्रवासियों से मिलने की भी उत्सुकता जताई, जो भारत के बाहर सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक हैं। यह मुलाकातें वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक और सामुदायिक जुड़ाव को मजबूत करती हैं।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा एक बहुआयामी कार्यक्रम था, जिसने न केवल वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा दिया, बल्कि विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक संबंधों, भू-राजनीतिक दांव-पेंचों और भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया।
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